By, Shrikant Pratyush
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हमें राजनीतिक और सामाजिक वातावरण में परिवर्तन लाना होगा : सुदेश महतो

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आल झारखण्ड स्टूडेंटस यूनियन(आजसू )सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि सामाजिक न्याय के बगैर विकास की अवधारणा को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता। बाबा साहेब ने सामाजिक समानता वाले समाज की परिकल्पना की थी।

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हमें राजनीतिक और सामाजिक वातावरण में परिवर्तन लाना होगा : सुदेश महतो

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: आल झारखण्ड स्टूडेंटस यूनियन(आजसू )सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि सामाजिक न्याय के बगैर विकास की अवधारणा को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता। बाबा साहेब ने सामाजिक समानता वाले समाज की परिकल्पना की थी। महतो गुरूवार को पार्टी कार्यालय में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की 62वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके सपनों का समाज बनाने के लिए हमें राजनीतिक और सामाजिक वातावरण में परिवर्तन लाना होगा। सशक्त भारत का निर्माण सशक्त समाज से ही संभव है। उन्होंने कहा कि समाज के हाशिए पर गुजर बसर कर रहे वर्गों को स्वयं अपना सामाजिक और राजनीतिक सामर्थ्य विकसित करना होगा। दूसरों को ताकत देकर अपने अधिकार को खोना नहीं है। किसी भी समाज या समुदाय को अपनी पहचान और हैसियत को मजबूत बनाने को लिए राजनीति में भागीदारी के साथ जगह बनाना अतिआवश्यक है। इस दौरान पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकताओं द्वारा उन्हें याद किया गया एवं पुष्प अर्पित किया गया।
इस मौके पर पार्टी के महासचिव राजेंद्र मेहता ने कहा कि भीम राव अंबेडकर ने दलितों, वंचितों को आवाज दी। उन्होंने समान शिक्षा, समान अवसर एवं आर्थिक समानता वाले समाज का सपना देखा था। उनके सपने को पूरा करने के लिए सामाजिक और राजनीतिक फलक व्यापक वैचारिक जन आंदोलन की जरुरत है। आजसू पार्टी की सहयोगी संगठन अखिल झारखण्ड अनुसूचितजाति महासभा के संयोजक सरजीत मिर्धा ने कहा कि बाबा साहेब ने अपने समय-संदर्भ में रहते हुए समानता की रणनीति बताई। उनके समय और हमारे समय में यह समानता है कि तमाम बदलावों के बावजूद भारतीय समाज आज भी जाति-ग्रस्त है, और जाति-उन्मूलन हमारे लिए आज भी एक ऐसा लक्ष्य है जिसे हासिल करना सुदूर भविष्य में ही संभव हो सकेगा।

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