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MY समीकरण वाली सीट पर EBC नेता को क्यों दिया टिकट?

पूर्णिया की लोक सभा सीट पर 7 लाख मुस्लिम, 1.5 लाख यादव फिर क्यों नहीं मिला पप्पू को टिकेट .

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सिटी पोस्ट लाइव : पूर्णिया लोकसभा सीट को लेकर घमासान मचा हुआ है. पप्पू यादव ने अपनी पार्टी जन अधिकार का कांग्रेस में विलय करा दिया. पप्पू यादव का दावा था कि प्रियंका गांधी ने उनसे वादा किया था कि पूर्णिया सीट से वह पार्टी के उम्मीदवार होंगे. पप्पू यादव ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी. इस बीच विधायक बीमा भारती JDU से RJD में शामिल हो गई. लालू यादव ने उन्हें RJD  का सिंबल भी दे दिया.

पप्पू यादव बेहद नाराज हैं और कह रहे हैं- मर जाएंगे मिट जाएंगे, लेकिन पूर्णिया नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने घोषणा भी कर दी है कि चाहे कुछ भी हो जाए दो अप्रैल को वह पूर्णिया से नामांकन करेंगे.ये सवाल सबके जेहन में है कि  पप्पू यादव पूर्णिया सीट को लेकर इतने आक्रामक क्यों हैं. कांग्रेस क्यों नाराज है. और इतना सब होने के बावजूद राजद अति पिछड़ा समाज से आने वाली बीमा भारती को उम्मीदवार बनाने पर क्यों अड़ी हुई है.पप्पू यादव पहले भी पूर्णिया से सांसद रहने के साथ साथ पांच बार  विधायक रह चुके हैं. इनकी गिनती कोशी और सीमांचल के बड़े नेता के तौर पर होती है. 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए वह लगभग छह महीने से सीमांचल और पूर्णिया में प्रणाम पूर्णिया यात्रा कर रहे थे. लगातार लोगों के बीच जाकर लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे और इसी वजह से उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में किया था. लेकिन, उन्हें तब झटका लगा जब राजद ने यहां से बीमा भारती को मैदान में उतार दिया.

बीमा भारती पूर्णिया लोकसभा सीट के रूपौली से विधायक हैं और अति पिछड़ा समाज से आती हैं. RJD का दामन थामने के बाद चुनावी मैदान में हैं और तीन अप्रैल को नामांकन दाखिल करने की घोषणा कर चुकी हैं. पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं. बीमा भारती पर RJD  ने एक रणनीति के तहत दांव लगाया है .JDU  के संतोष कुशवाहा के सामने अति पिछड़ा उम्मीदवार उतार एनडीए के बड़े वोट बैंक में सेंघ लगाने का प्रयास किया है.बीमा भारती कहती हैं कि पूर्णिया उनका कर्म क्षेत्र है और उन्हें लालू और तेजस्वी का आशीर्वाद मिल चुका है. वह न सिर्फ़ जीत रही हैं बल्कि सीमांचल का अति पिछड़ा समाज भी पूरी तरह महागठबंधन की तरफ है.

RJD  को उम्मीद है कि एमवाई (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक के साथ-साथ अति पिछड़ा वोटर में सेंध लगने पर पूर्णिया सीट पर वह मजबूत स्थिति में होगी. इस रणनीति से एनडीए की मजबूत सीट पर कब्जा किया जा सकता है. इसका फायदा सीमांचल की दूसरी सीटों पर भी मिल सकता है. पप्पू यादव की छवि कोशी और सीमांचल के बड़े यादव नेता की है. अगर वह पूर्णिया से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते और जीतते, तो न सिर्फ उनका महत्व बढ़ जाता बल्कि उन्हें कांग्रेस के बड़े यादव नेता के तौर पर चेहरा भी मिल जाता. यह बात राजद को गंवारा नहीं है.

कांग्रेस और राजद के बीच पूर्णिया सीट को लेकर फंसे मामले पर JDU  और एनडीए की भी नजर है.JDU  ने पूर्णिया सीट पर दो बार के सांसद संतोष कुशवाहा को फिर से मैदान में उतारा है. कुशवाहा कहते हैं कि चुनाव कोई लड़े जीत हमारी ही होगी. हमारा मुद्दा सिर्फ एक है- विकास का मुद्दा.पूर्णिया एमवाई समीकरण वाली सीट है. यहां लगभग 22 लाख मतदाता हैं. इसमें मुस्लिम करीब सात लाख, यादव – 1.5 लाख, अति पिछड़ा – 2 लाख, दलित आदिवासी – 4 लाख, ब्राह्मण – 1 से 1.5 लाख, राजपूत – 1 से 1.5 लाख हैं.पूर्णिया बंगाल के नजदीक है. बावजूद इसके ये इलाका पिछड़ा हुआ है. यहां का जितना विकास होना चाहिए वो नहीं हो पाया है. रेलवे के मामले में अभी भी पूर्णिया काफी पीछे है. पूर्णिया में एयरपोर्ट की मांग कई सालों से हो रही है.

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