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वैसे किसी आदमी को बिहार आने की इजाजत नहीं देंगे जो शराब पीने की इच्छा रखते हैं : सीएम

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सिटी पोस्ट लाइव : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज सासाराम के न्यू स्टेडियम फजलगंज में बिहार में पूर्ण नशामुक्ति, दहेज प्रथा एवं बाल विवाह उन्मूलन हेतु समाज सुधार अभियान का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को लेकर बने मंच पर प्रमंडलीय आयुक्त पटना संजय कुमार अग्रवाल ने पौधा भेंटकर तथा जिलाधिकारी रोहतास धर्मेंद्र कुमार ने प्रतीक चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। जीविका दीदियों ने बढ़ते कदम बढ़ते कदम स्वागत गायन गाया तथा कला जत्था के कलाकारों ने मद्य निषेध गीत- हम सबका यह अभियान है, नशामुक्त पैगाम है का गायन कर जनसभा में उपस्थित लोगों को जागरूक किया। रोहतास, बक्सर, भोजपुर एवं कैमूर जिले के सतत् जीविकोपार्जन योजना के लाभार्थियों, स्वयं सहायता समूहों का बैंक से जुड़ाव, स्वयं सहायता समूह को जल-जीवन हरियाली अभियान के तहत 19 तालाबों का हस्तांतरण का प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया। वाहन जनित सड़क दुर्घटना हेतु मृतक की आश्रित श्रीमती पुष्पा कुमारी को 5 लाख रुपये मुआवजे का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन एम्बुलेंस योजना के लाभार्थियों को चाभी, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना के लाभार्थियों को भी मुख्यमंत्री के द्वारा डमी चेक प्रदान किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आप सभी की उपस्थिति के लिए धन्यवाद देता हूं। हमलोगों ने नशामुक्ति अभियान चलाया और उसको लागू किया। समाज सुधार अभियान चलाया जा रहा है। हाल में घटना घटित हुई जहरीली शराब पीने से 40 लोगों की मृत्यु हुई। हम तो निरंतर बैठक करते रहते हैं। दो साल से कोरोना कारहे हैं, यह बहुत गलत बात है। उन्होंने कहा कि जीविका दीदियां सहित 6 लोगों ने अपनी आप बीती सुनाया। इसी तरह से अभियान सभी जगह चलाया जाना चाहिए। हमलोगों को 24 नवंबर 2005 से काम करने का मौका मिला, तब से आपकी सेवा करते आ रहे हैं। पहले स्कूल की स्थिति क्या थी? कितनी बेटियां पढ़ती थी ? स्वास्थ्य सेवा की क्या स्थिति थी? 2006 में हमने सर्वेक्षण कराया तो स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क की क्या स्थिति थी ? शाम होते कोई घर से निकल नहीं पाता था। अपराध की घटनाएं कितनी घटित होती थी।

आज स्थिति कितनी बदली। महिलाओं का उत्थान, एस०सी० एस०टी०, अतिपिछड़े, अल्पसंख्यक सभी समुदाय के कल्याण के लिए हमलोगों ने काम किया। सिर्फ विकास का काम करने से काम नहीं चलेगा बल्कि समाज सुधार भी करना होगा। कर्पूरी ठाकुर जी जब वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने शराबंदी लागू किया लेकिन दो वर्ष बाद फिर से शराब शुरु कर दिया गया। हमारे मन में शराबबंदी की बात शुरु से थी। हमारे मन में आशंका थी कि शराबबंदी लागू कर पाएंगे कि नहीं लेकिन जब वर्ष 2015 में महिलाओं के एक सम्मेलन में मैं गया हुआ था, महिलाओं के विकास की बातें हो रही थीं। जैसे ही हम बोलकर बैठे कि पीछे से महिलाओं ने आवाज लगायी शराब बंद कराईये। उसके बाद वापस हम माइक पर आये और कहा कि अगली बार अगर काम करने का मौका मिलेगा तो शराबबंदी लागू कर देंगे और हमने इसको लागू किया। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 अप्रैल 2016 को पहले ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों में विदेशी शराब बंद नहीं किया गया था। शहरों में महिलाएं, लड़कियां, पुरुष वर्ग भी शराब के आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया और दुकानों को खोलने नहीं दिया, उसके बाद 5 अप्रैल 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। बहुत बड़े पैमाने पर लोगों ने साथ दिया। उन्होंने कहा कि जीविका समूह की एक महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा- मेरे पति काम से लौटते थे दारू पीकर आते थे, परिवार में सभी को बुरा लगता था और वे देखने में खराब लगते थे।

अब जब शराबबंदी हो गई तो वे बाजार से सब्जी, फल लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं और अब देखने में अच्छे लगते हैं। यह कितना बड़ा परिवर्तन हुआ है। समाज में कुछ लोग गड़बड़ी करने वाले होते हैं चाहे वे किसी भी धर्म के मानने वाले लोग हों। कितना भी अच्छा काम कीजिएगा कुछ लोग तो गड़बड़ी करेंगे ही लेकिन हमलोगों को अभियान चलाते रहना है। हमने रिपोर्ट मांगी है कि कितने लोगों पर कार्रवाई हुई है। चार जिलों का यहां पर हम अभियान चला रहे हैं, यह तो बॉर्डर इलाका है। शराबबंदी को लेकर मुझे कई राज्यों में बुलाया गया। यू०पी०, झारखंड कहां लोग हमको नहीं बुलाया। अभी यहां की बैठक के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि के साथ बैठक करेंगे। इस इलाके में जागृति बहुत है। कोई गड़बड़ न करे इस पर ध्यान बनाए रखने की जरुरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत लोग कहते हैं शराबबंदी के कारण पर्यटक बिहार नहीं आएंगे। गड़बड़ करने वाले लोग अनाप-शनाप बयान देते रहते हैं। हमलोग वैसे किसी आदमी को बिहार आने की इजाजत नहीं देंगे जो शराब पीने की इच्छा रखते हैं। अगर शराब पीना है तो बिहार मत आईये। कोरोना काल में इसमें थोड़ी कमी आयी मगर शराबबंदी के बाद 2 करोड़ से ज्यादा पर्यटक बिहार आए हैं। बापू की बातों को सभी को मानना चाहिए। उनके संदेश को हमलोग हर जगह प्रचारित करवा रहे हैं। बापू ने कहा था कि शराब न सिर्फ आदमी का पैसा बल्कि बुद्धि भी खत्म कर देती है। शराब पीने वाला इंसान हैवान हो जाता है। अगर एक घंटे के लिए भी मुझे देश का तानाशाह बना दिया जाय तो मैं सभी शराब की दुकानें बंद करवा दूंगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 से 2018 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया का सर्वेक्षण कराया था और 2018 में ही उसकी रिपोर्ट को प्रकाशित किया था, जिसमें बताया गयालोगों की 13.5 प्रतिशत मृत्यु शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियां होती हैं। शराब के सेवन से 48 प्रतिशत लोग लीवर की गंभीर बीमारी लीवर सिरोसिस के शिकार होते हैं, जबकि 18 प्रतिशत लोग शराब पीने से आत्महत्या कर लेते हैं। शराब पीने के कारण 18 प्रतिशत आपसी झगड़े होते हैं। शराब पीने से दुनिया भर में 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। माउथ कैंसर के कुल मामलों का 26 प्रतिशत शराब पीने के कारण होता है। पैंक्रियाज के 26 प्रतिशत, बड़ी आंत की बीमारी के 11 प्रतिशत मामले शराब पीने के कारण होते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के 5 प्रतिशत और टीबी के 20 प्रतिशत मामले शराब सेवन से होते है। बापू के जो विचार हैं और जो दुनिया भर का सर्वेक्षण है उसे लोगों को शराब के दुषप्रभाव को बताएं कि शराब कितनी बूरी चीज है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दहेज प्रथा बहुत बुरी चीज है। दहेज लेना कानूनी रूप से अपराध है। बाल विवाह करने से तरह-तरह की परेशानी होती है, बेटियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। बेटियों का मानसिक एवं शारीरिक रूप से विकास नहीं हो पाता है तथा तरह तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। अभी एक बालिका ने यहां अपने अनुभव को साझा किया, जिसके परिजन कम उम्र में ही उसकी शादी करना चाहते थे उसके खिलाफ आवाज बुलंद किया और आज पढ़ाई कर रही है और डॉक्टर बनने की चाहत है। अगर कम उम्र में उसकी शादी हो जाती तो अनेक प्रकार की मुसीबतों से वो घिरी होती हैं इसलिए ससमय शादी करना ही बेहतर है।

सामाजिक तौर पर विकास नहीं हो पाता है। किसी भी स्तर पर किसी को बाल विवाह मत करने दीजिए। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ भी लगातार अभियान चलाते रहिए । बाल विवाह बहुत बड़ा शोषण है। बाल विवाह और दहेज प्रथा को लेकर लोगों को जागरुक कीजिए। 2 अक्टूबर 2017 को दहेज प्रथा उन्मूलन अभियान शुरु किया गया था। महिलाओं के विकास के लिए हमलोग लगातार काम कर रहे हैं। लड़की अगर इंटर पास करेगी तो उसको 25 हजार रूपये और स्नातक पास करेगी तो 50 हजार रुपए देंगे। महिलाओं की देन है कि हमको ये जीवन मिला है। पुरुष और स्त्री दोनों समाज के अंग हैं, इन दोनों के बगैर समाज का विकास संभव नहीं। बाल विवाह को हमेशा के लिए समाप्त कर देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने जीविका समूह को बनाया। वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर के 2-3 जगहों पर जाकर हमने इनके कार्यों को देखा था। स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं काम कर रही थीं। फिर हमने वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर इसको शुरु कराया। हमलोगों का 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य था। अब तो 10 लाख के लक्ष्य को भी पार कर लिया गया है। 1 करोड़ 27 लाख महिलाएं इससे जुड़ गई हैं। ‘जीविका’ का नामकरण हमलोगों ने ही किया है, इसे याद रखिएगा। उस समय की केंद्र सरकार ने इससे प्रभावित होकर पूरे देश में इसे ‘आजीविका’ नाम से शुरू किया, यह कितनी बड़ी बात है। हमने निर्णय लिया है कि जीविका समूह ही अस्पतालों में मरीजों को दिये जाने वाला खाना बनाएंगी, इस निर्णय से आज कितना बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

समाज सुधार के बिना विकास का कोई मतलब नहीं है। विकास के साथ समाज सुधार होगा तो समाज, देश और राज्य आगे बढ़ेगा। आपलोगों से उम्मीद करता हूं कि आप अपने गांव इलाकों में जाकर इस अभियान को चलाईयेगा। सभी लोगों से आग्रह है कि प्रचार कीजिए की दहेज प्रथा बहुत खराब काम है। हमने कहा था कि जिस कार्ड पर दहेज मुक्त शादी लिखा होगा उसी शादी में हम जाएंगे, आज फिर इस बात को दुहराते हैं कि मेरा कितना भी कोई नजदीकी होगा, अगर कार्ड पर दहेज मुक्त शादी नहीं लिखा होगा तो हम उस शादी में नहीं जाएंगे। आपने हाथ उठाकर संकल्प भी लिया इस बात के लिए आपलोगों को हृदय धन्यवाद। यदि आप दारू पीते हैं तो बापू के खिलाफ हैं। दारू पीनेवाले कुछ लोग खुद को ज्यादा काबिल मानते हैंलेकिन वो काबिल नहीं हैं कितने भी पढ़े लिखे हैं और यदि वे दारु पीते हैं तो हम उनको काबिल नहीं मानते हैं।

ऐसे लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों के विरोधी हैं। समाज हित के खिलाफ है। हमको किसी पब्लिसिटी से कोई मतलब नहीं है। कुछ लोग पब्लिसिटी पाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। पत्रकार मित्रों से भी कहेंगे कि कभी-कभी कागज पर, ट्वीटर पर भी लिखिएगा तो इसका बहुत बड़ा समाज में असर पड़ेगा। आपकी सेवा ही हमारा धर्म है। आपस में प्रेम, भाईचारे का भाव रहना चाहिए तभी समाज आगे बढ़ेगा। तरह-तरह की बातें होती रहती हैं इसलिए आपसी एकजुटता रखिए हमलोग आगे बढ़ेंगे और समाज भी आगे बढ़ेगा। आपने जो संकल्प लिया है उसके लिए भी आपको धन्यवाद देता हूं।

कार्यक्रम को मंत्री मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन सुनील कुमार, मंत्री भवन निर्माण सह रोहतास जिले के प्रभारी मंत्री अशोक चौधरी, मंत्री स्वास्थ्य सह बक्सर एवं भोजपुर जिले के प्रभारी मंत्री मंगल पाण्डेय, मंत्री लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण सह कैमूर जिले के प्रभारी मंत्री रामप्रीत पासवान, कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, मंत्री अल्पसंख्यक कल्याण श्री जमा खान, मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक एस०के० सिंघल, अपर मुख्य सचिव गृह चैतन्य प्रसाद, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव के०के० पाठक ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत नशाखोरी, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभावों की भुक्तभोगी एवं सतत् जीविकोपार्जन योजना की लाभार्थी श्रीमती सरोजिनी देवी, श्रीमती मीरा देवी, श्रीमती मीना देवी, श्रीमती ललिता देवी, श्रीमती जीरा कुंवर ने अपने-अपने अनुभवों को साझा किया। बाल विवाह के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनेवाली सुश्री कामिनी शर्मा ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बातें रखी। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा मुक्त समाज बनाने के लिए महिलाओं ने अपनी-अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। महिलाओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा किये गए विकास कार्यों एवं चलाए जा रहे समाज सुधार अभियान की काफी सराहना की। सरकार द्वारा कराए गए हर घर शौचालय निर्माण कार्य पर महिलाओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हमें काफी सहूलियत मिली है।

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