By, Shrikant Pratyush
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सावन में कैसे करें भगवान् शिव को प्रसन्न, जानिये 7 विशेष उपाय

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सावन  का महीना भगवान् शिव को प्रसन्न करने का सबसे बढ़िया समय माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में शिव बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

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सावन में कैसे करें भगवान् शिव को प्रसन्न, जानिये 7 विशेष उपाय

सिटी पोस्ट लाइव : सावन  का महीना भगवान् शिव को प्रसन्न करने का सबसे बढ़िया समय माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में शिव बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. शिव के पूजन का महीना सावन अब शुरू हो चूका है.नभ-जल-पृथ्वी सबकुछ शिवमय है. जरूरी नहीं हर कोई प्रतिदिन शिवजी को जल ही चढ़ाए या मंदिर में दर्शन के लिए जाए. भोले बाबा के प्रति अपना प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने के और भी कई तरीके हैं.आप भी अपनी सहजता के अनुसार कुछ धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से शिवकृपा के भागी बन सकते हैं.

वैद्यनाथ धाम और हरिद्वार के साथ ही काशी भी भगवान शिव का धाम माना जाता है. धार्मिक पुस्तकों में उल्लेख मिलता है कि इन तीनों ही स्थानों से भोले बाबा को विशेष प्रेम है. सावन के महीने में शिव भक्त काशी की परिक्रमा करते हैं. इसे पंचकोसी यात्रा के नाम से भी जाना जाता है. इस यात्रा में पिंगलेश्वर महादेव, कायावरुनेश्वर महादेव, विलवेश्वर महादेव और नीलकंठेश्वर महादेव की यात्रा और दर्शन सम्मिलित हैं.

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सावन के महीने में शिव भक्त अपने घर पर भी जप और अनुष्ठान करा सकते हैं. महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान शिव को प्रसन्न करने का सबसे बढ़िया जरिया मन जाता है. इस अनुष्ठान को घर में कराने से परिवार पर शिवजी की कृपा बनी रहती है. अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. कुछ लोग खुद से प्रण लेते हैं कि इस सावन हम इतनी माला का जप करेंगे.

भगवान शिव के जो भक्त प्रतिदिन मंदिर नहीं जा पाते हैं या अनुष्ठान का खर्च नहीं वहन कर सकते हैं, वे घर पर ‘ऊं नम: शिवाय’ मंत्र का लेखन कर शिव को प्रसन्न कर सकते हैं.मंत्र लेखन पुस्तक को सावन के महीने में पूरा कर भगवान शिव को समर्पित किया जाता है. वहीं, कुछ लोग इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से घर पर ही करते हैं.मंदिर में जाकर या फिर घर में अभिषेक करने से भी भगवन शिव बहुत प्रसन्न होते हैं.लेकिन पूरा फल तभी मिलेगा तब अभिषेक संध्या वंदन करनेवाले ब्राहमण कराएं. वैसे किसी भी पूजा का तभी फल मिलता है जब उसे करानेवाले ब्राह्मण संध्या करनेवाले हों. जो ब्राहमण संध्या नहीं करते उनकी पूजा शिव स्वीकार नहीं करते.पूजा के बाद ब्राहमण भोज, ब्राहमण दक्षिणा जरुर दें नहीं तो पूजा का कोई फल प्राप्त नहीं होगा.

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