By, Shrikant Pratyush
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बेगूसराय : हाथी, घोड़ा, ऊंट और गाजे-बाजे के साथ कल्पवास मेले की आज अंतिम परिक्रमा सम्पन्न

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बेगूसराय के सिमरिया धाम में कल्पवास मेले की आज अंतिम परिक्रमा सम्पन्न हो गई. सर्वमंगला आध्यात्मिक पीठ द्वारा आयोजित इस परिक्रमा में हज़ारों कल्पवासी, खालसा, साधु-संत और श्रद्धालुओं ने भाग लिया

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बेगूसराय : हाथी, घोड़ा, ऊंट और गाजे-बाजे के साथ कल्पवास मेले की आज अंतिम परिक्रमा सम्पन्न

सिटी पोस्ट लाइव : बेगूसराय के सिमरिया धाम में कल्पवास मेले की आज अंतिम परिक्रमा सम्पन्न हो गई. सर्वमंगला आध्यात्मिक पीठ द्वारा आयोजित इस परिक्रमा में हज़ारों कल्पवासी, खालसा, साधु-संत और श्रद्धालुओं ने भाग लिया. पीठ के स्वामी चिदात्मन जी महाराज के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने हाथी- घोड़ा – ऊंट, गाजे-बाजे और भजन कीर्तन के साथ करीब 5 किलोमीटर की गंगा तट की परिक्रमा पूरी की. परिक्रमा के  दौरान जय गोविन्द हरे गोपाल हरे, उद्घोष से पूरा सिमरिया धाम गुंजायमान हो रहा था. प्रशासन के द्वारा भी इस परिक्रमा के सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस (police) बल तैनात किए गए थे. श्रद्धालुओं को मार्ग में कोई कठिनाई नहीं हो इसके लिए साफ-सफाई की खास व्यवस्था की गई थी.

गौरतलब है राजकीय सिमरिया कल्पवास मेले के दौरान तीन परिक्रमाओं की परंपरा रही है और यह तीसरी और अंतिम परिक्रमा थी. श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ देखी गई. सर्वमंगला आश्रम के संत स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने परिक्रमा के बाद अपने प्रवचन में कल्पवास के दौरान गंगा परिक्रमा के आध्यात्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि इससे आत्मशुद्धि (Self-purification) तो होती ही है अलौकिक शक्ति भी प्राप्त होती है. परिक्रमा स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए की जाती. उन्होंने कहा कि सिमरिया धाम में समुद्र मंथन के बाद से ही कल्पवास होता रहा है और शास्त्र के मुताबिक, कल्पवास के दौरान मिथिला के राजा जनक और सीता माता का भी पदार्पण होता था इसलिए आध्यात्मिक दृष्टि से इसका बड़ा महत्व है.

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