अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ मनाया गया

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव

अयोध्या: राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के अवसर पर अयोध्या में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जो आज से शुरू हुआ। इस दौरान अयोध्या में जश्न का माहौल बना हुआ है, और त्रेतायुग की अयोध्या की छवि एक बार फिर जीवंत हो उठी है, जिसमें भारतीय संस्कृति और भक्ति संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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सीएम योगी ने अयोध्या में हुए कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा, “आज हर रामभक्त में उल्लास है। पांच सौ साल के संघर्ष के बाद आज रामलला विराजमान हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या अब एक सोलर सिटी बन चुकी है और आज अयोध्या में अयोध्या होने का अहसास हो रहा है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में अयोध्या जैसे विकास की दिशा अब अन्य शहरों में भी होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अयोध्या में सत्य का उजागर होना अब संपूर्ण दुनिया देख रही है।

प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकें। साथ ही, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि कार्यक्रम को सही ढंग से संपन्न किया जा सके। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीराम के अभिषेक से होई, जिसमें 56 प्रकार के व्यंजन भगवान राम को अर्पित किए गए। 11 जनवरी को सुबह 10 बजे से रामलला का अभिषेक किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। इस अवसर पर श्रद्धालु भी अंगद टीला से रामलला के दर्शन करेंगे।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान कई नामी व्यक्तित्व भी शामिल हुए। गायिका उषा मंगेशकर और मयूरेश पई अपनी भजन गायन से भक्ति संगीत की शुरुआत करेंगे, इसके बाद सितार और वायलिन की धुन भी बजेगी। साथ ही, 12 जनवरी को लोकगायिका शैलेश श्रीवास्तव अपनी प्रस्तुति देंगी। 11 से 13 जनवरी तक अनेक धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जिसमें सुंदरकांड का पाठ, राम रक्षा स्त्रोत और ऋग्वेद-यजुर्वेद के मंत्रों का उच्चारण होगा। साथ ही, भोपाल के वाद्य यंत्रों से रामधुन कीर्तन भी किया जाएगा।

इस भव्य कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन ने अयोध्या में रूट डायवर्जन और चेकिंग के जरिए सुनिश्चित किया है कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से कार्यक्रम का हिस्सा बन सकें। महिला पुलिस कर्मियों की भी तैनाती की गई है।  इस उत्सव के जरिए एक बार फिर से अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक महत्व को प्रकट किया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया में गूंजेगा।

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