By, Shrikant Pratyush
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रामनवमी 13 को, दूसरा मंगलवारी जुलूस दो अप्रैल को

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रामनवमी अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। धर्म का पताका हमेशा ऊंचा रहे, इसी मनोकामना का पर्व रामनवमी है। झारखंड में भी रामनवमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।

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रामनवमी 13 को, दूसरा मंगलवारी जुलूस दो अप्रैल को

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: रामनवमी अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। धर्म का पताका हमेशा ऊंचा रहे, इसी मनोकामना का पर्व रामनवमी है। झारखंड में भी रामनवमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में विशेष तौर पर प्रबंध किए जा रहे हैं। भक्तों के लिए राजधानी रांची पूरी तरह सज गई है। जगह-जगह महावीरी पताके लगाये गये हैं। मंदिरों में पूजा- पाठ के बीच जय श्रीराम और जय हनुमान के नारे गूंजने लगे हैं। बाजारों में तरह –तरह के झंडे बिकने लगे हैं ताकि 13 अप्रैल को रामनवमी के दिन राजधानी रांची के चौक- चौराहों पर रंग-बिरंगे भगवा और महावीरी झंडे लहराते रहें। इसी दिन महाअष्टमी और महानवमी है। शनिवार को मध्याहणव्यापिनी में नवमी तिथि मिलने के कारण इसी दिन भगवान श्रीराम की जयंती मनायी जायेगी। शनिवार को दिन के 9.16 से रविवार सुबह छह बजे तक नवमी है। रविवार को महध्याहन काल में नवमी नहीं रहने के कारण शनिवार को ही रामनवमी मनायी जायेगी। भगवान श्रीराम की जयंती को लेकर इस बार सिर्फ तीन मंगलवारी जुलूस निकाली जायेगी, जिसमें पहली मंगलवारी जुलूस 26 मार्च को धूमधाम के साथ निकाली गयी। जबिक दूसरी मंगलवारी जुलूस दो अप्रैल को और अंतिम मंगलवारी जुलूस नौ अप्रैल को निकाला जायेगा।
छह से वासंतिक नवरात्र
यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, छह अप्रैल से प्रारंभ है और समापन 14 अप्रैल को है। नवरात्रि में मां भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है।
छह अप्रैल (पहला दिन)
प्रतिपदा – इस दिन पर घटत्पन, चंद्र दर्शन और शैलपुत्री पूजा की जाती है।
सात अप्रैल (दूसरा दिन)
इस दिन पर सिंधारा दौज और माता ब्रह्राचारिणी पूजा की जाती है।
आठ अप्रैल (तीसरा दिन)
यह दिन गौरी तेज या सौजन्य तीज के रूप में मनाया जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान चन्द्रघंटा की पूजा है।
नौ अप्रैल (चौथा दिन)
वरद विनायक चौथ के रूप में भी जाना जाता है, इस दिन का मुख्य अनुष्ठान कूष्मांडा की पूजा है।
10अप्रैल (पांचवा दिन)
इस दिन को लक्ष्मी पंचमी कहा जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान नाग पूजा और स्कंदमाता की पूजा जाती है।
11अप्रैल (छटा दिन)
इसे यमुना छत या स्कंद सस्थी के रूप में जाना जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान कात्यायनी की पूजा है।
12अप्रैल (सातवां दिन)
सप्तमी को महा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है और देवी का आशीर्वाद मांगने के लिए “कालरात्रि की पूजा” की जाती है।
13 अप्रैल (आठवां दिन)
अष्टमी को दुर्गा अष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है और इसे अन्नपूर्णा अष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन महागौरी की पूजा और संधि पूजा की जाती है।
14 अप्रैल (नौंवा दिन)
नवमी नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन राम नवमी के रूप में मनाया जाता है और इस दिन सिद्धिंदात्री की पूजा महाशय की जाती है।
चैती छठ नौ से
नौ अप्रैल से चैती छठ की शुरूआत होगी। पहले दिन नहाय-खाय है। दस को खरना है। 11 को अस्ताचलगामी और 12 उदयाचलगामी सूर्य की अर्घ्य दिया जायेगा। इसके साथ ही चैती छठ का समापन हो जायेगा।

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