By, Shrikant Pratyush
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इनसाइड स्टोरी : नागरिकता संशोधन बिल को लेकर सबसे ज्यादा क्यों अशांत है असम?

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सबसे बड़ा सवाल ये है कि इतने बड़े आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है. क्या यह स्वत:स्फूर्त जन आंदोलन है, या फिर इसकी कमान किसी व्यक्ति या संगठन के हाथों में है. दरअसल, इस जन-आंदोलन की कमान ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के प्रमुख समुजज्ल भट्टाचार्य के हाथ में है.हालांकि वो इसे स्वतः स्फूर्त छात्रों का आंदोलन बता रहे हैं .उनका कहना है कि “असम प्राइड और असमिया पहचान के लिए चल रहे इस आंदोलन को सबका समर्थन हासिल है.

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इनसाइड स्टोरी: नागरिकता संशोधन बिल को लेकर सबसे ज्यादा क्यों अशांत है असम?

सिटी पोस्ट लाइव : नागरिकता संशोधन बिल को लेकर सबसे ज्यादा अशांति  असम में  है. यह आंदोलन हिंसक हो चूका है.ऐसे हालात वहां चर्चित असम आंदोलन के दौरान पैदा हुए थे. यहाँ के लोगों का कहना है कि गुवाहाटी की सड़कों पर ऐसा जनसैलाब पहली बार दिखा है.गौरतलब है कि  असमिया अस्मिता को लेकर हुए उस आंदोलन में सैकड़ों लोगों को अपनी जानें गँवानी पड़ी थीं. सबके जेहन में एक ही सवाल- क्या वहीं घटना एकबार  फिर से असं में दुहराई जाने वाली है.

सबसे बड़ा सवाल ये है कि इतने बड़े आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है. क्या यह स्वत:स्फूर्त जन आंदोलन है, या फिर इसकी कमान किसी व्यक्ति या संगठन के हाथों में है. दरअसल, इस जन-आंदोलन की कमान ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के प्रमुख समुजज्ल भट्टाचार्य के हाथ में है.हालांकि वो इसे स्वतः स्फूर्त छात्रों का आंदोलन बता रहे हैं. उनका कहना है कि “असम प्राइड और असमिया पहचान के लिए चल रहे इस आंदोलन को सबका समर्थन हासिल है. हमने कैब को संसद में लाए जाने के ख़िलाफ़ 10 दिसंबर को पूर्वोत्तर राज्यों में बंद बुलाया था. नॉर्थ इस्ट स्टूडेंट यूनियन (नेसो) के बैनर तले हुए उस अभूतपूर्व बंद के अगले दिन 11 दिसंबर को लोग स्वत: स्फूर्त सड़कों पर निकले.”

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इस दौरान हिंसा हुई. 12 तारीख़ को लताशील मैदान में नॉर्थ इस्ट स्टूडेंट यूनियन (नेसो) के बैनर तले एक सभा हुई.उस सभा में ये तय किया गया कि यह  आंदोलन शांतिपूर्ण और प्रजातांत्रिक तरीक़े से होगा.भट्टाचार्य कहते हैं कि वो योजनाबद्ध तरीक़े से आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में अगर कोई हिंसक रास्ता अख़्तियार करता है, तो उनके आंदोलन का दुश्मन है, न कि दोस्त.इसमे शक की कोई गुंजाइश नहीं कि शुरुआती तौर पर छात्रों और युवाओं द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है. अब यह जनता का आंदोलन बन चुका है. इसमें असमिया समाज के हर तबके के लोग शामिल हैं.

सूत्रों के अनुसार असमिया पैरेंट्स ने बच्चों को कह दिया है कि वे कैब का विरोध करें. आंदोलन के लिए अगर वे रात में घर नहीं आते हैं, तब भी कोई बात नहीं. हम उनके साथ हैं. हमें अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करनी है. इसलिए यह आंदोलन नागरिकता संशोधन क़ानून के वापस होने तक चलने वाला है. मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल भी मानते हैं कि यह असम प्राइड की लड़ाई है. वो कहते हैं कि हर आदमी का अपने राज्य और भूमि को लेकर आत्म स्वाभिमान होता है. असम के लोग भी इसी समाज के हिस्सा हैं. उनको भी अपने राज्य-देश पर गौरव है.लेकिन, उन्हें यह समझना होगा कि कैब दरअसल असम के लोगों को उनका अधिकार दिलाने के लिए है. अभी कुछ नेगेटिव लोग ग़लत सूचनाएं फैलाकर हिंसा भड़का रहे हैं.

आकाश कुमार की रिपोर्ट 

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