By, Shrikant Pratyush
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पहले नो दारू नो बियर, अब नो चिकेन आल्सो डियर, मुर्गे बोले-‘हैप्पी न्यू ईयर’

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रोज जान की खैर मांगने वाले मुर्गों को यह खुशकिस्मती कम हीं हासिल होती है कि रोज काटे जाने वाले मौत का उनका मुकद्दर इतना बदल जाए कि मुर्गाें को जायका ले लेकर अपनी हलक में उड़ेलने वाले लोग उनसे परहेज करने लगे।

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पहले नो दारू नो बियर, अब नो चिकेन आल्सो डियर, मुर्गे बोले-‘हैप्पी न्यू ईयर’

सिटी पोस्ट लाइवः रोज जान की खैर मांगने वाले मुर्गों को यह खुशकिस्मती कम हीं हासिल होती है कि रोज काटे जाने वाले मौत का उनका मुकद्दर इतना बदल जाए कि मुर्गाें को जायका ले लेकर अपनी हलक में उड़ेलने वाले लोग उनसे परहेज करने लगे। 2018 जाते-जाते क्या तकदीर दे गया है मुर्गों को जहां  कटना मरना तो दूर  उन्हें आत्महत्या तक का मौका नहीं मिल रहा। गाहे-बगाहे जब प्याज मंहगा हुआ तो जरूर मुर्गों की शहादत में थोड़ी कमी आती रही है लेकिन मुर्गाखोर जीभ उनकी जान की दुश्मन इस कदर है कि मंहगे प्याज ने भी मुर्गों को इंसानों की खुराक बनाया है वो तो भला हो बर्ड फ्लू का जो बीमारी नहीं इलाज बनकर साल के आखिरी महीने में आया। इलाज उनकी मौत का, उन्हें मरने से बचाने का और रोज डर से इंसानों के सामने फड़फड़ाने वाली औकात में पहली बार इंसानों को औकात दिखाने का। बगैर नहाए-धोआए शहीद होने वाले मुर्गों को मोक्ष से पहले पहली बार यह मौका मिला है कि ललचाई नजरों से देखने वाले इसंानों को यह कह सकें कि है हिम्मत तो खाकर देख। सामने आते किसी इंसान को देखकर यह कह सकें कि मरना है क्या?

क्या बीमारी है बर्ड फ्लू मुर्गों को शेर बना देती है और मुर्गाखोरों को शाकाहारी। और क्या शाकाहार है  इस बार। दारू बियर पहले हीं बंद है अब चिकेन भी नहीं तो खालिस सादगी वाला हैप्पी न्यू ईयर। कोई मारकाट नहीं, कोई हिंसा नहीं इस बार मुर्गों ने मुर्गा बनाया है, बर्ड फ्लू की वजह से पूरी मुर्गा फैमिली साथ मिलकर हैप्पी न्यू ईयर मनाएगी और बोलेगी पहले नो दारू, नो बियर, इस बार नो चिकेन आॅल्सो डियर,  इस बार हम मुर्गों का हैप्पी न्यू ईयर।

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