By, Shrikant Pratyush
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पार्टी में हुई बड़ी टूट के वावजूद बेफिक्र क्यों हैं चिराग पासवान, जानिये

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बिहार विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान ने बागी तेवर अपना कर NDA को खासतौर पर JDU को भारी नुकसान पहुंचा दिया. चिराग पासवान की वजह से 80 विधायकों वाली पार्टी वाली JDU 43 पर सिमट गई. फिर क्या था JDU ने भी बदला लेने की ठान ली.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान ने बागी तेवर अपना कर NDA को खासतौर पर JDU को भारी नुकसान पहुंचा दिया. चिराग पासवान की वजह से 80 विधायकों वाली वाली JDU पार्टी 43 पर सिमट गई. फिर क्या था JDU ने भी बदला लेने की ठान ली. JDU ने LJP को तोड़ने की मुहीम शुरू कर दी. गुरुवार को LJP के  208 नेताओं के पार्टी में शामिल करा लेने का दावा JDU ने किया तो लगा कि LJP ख़त्म हो गई. लेकिन बड़ा सवाल है कि LJP में हुई इस टूट से को कितना नुकसान और JDU को कितना फायदा हुआ है?

JDU ने एक झटके में LJP के सैकड़ों नेताओं को भले अपनी पार्टी में शामिल करा लिया हो लेकिन सच्चाई ये है कि इतने नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के वावजूद JDU विधानसभा चुनाव के दौरान LJP से मिले वोटों के नुकसान का एक चौथाई भी भरपाई नहीं कर पाई है. LJP से जो 208 नेता आए हैं, आंकड़ों के लिहाज से देखें तो औसतन 500 वोट भी अपने साथ नहीं ला पाए हैं. शामिल होनेवालों में LJP के 18 जिलाध्‍यक्ष और पांच प्रदेश महासचिव भी हैं.

JDU के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष RCP सिंह और प्रदेश स्तर के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में 208 LJP नेता JDU में शामिल हो गए. लेकिन JDU में शामिल होनेवाले सभी 208 नेताओं में सिर्फ 5 ने ही विधानसभा चुनाव लड़ा है. केशव सिंह 2015 में LJP के टिकट पर छपरा के मांझी से चुनाव लड़कर हारे. उन्हें 20,692 वोट मिले थे. रामनाथ रमण 2015 में ही LJP के टिकट पर राजापाकड़ से चुनाव लड़े और उन्हें हार मिली. सुभाष पासवान 2020 चुनाव में सिकंदरा से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर लड़े.​​ वोट 21 हजार मिले थे. सुरेन्द्र पंजियार 2020 में परिहार से राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े. वोट 2500 मिले थे.

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नीता सिंह ने 2005 में डेहरी से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. उन्हें 8500 वोट आए. जाहिर है LJP को तोड़ने  के वावजूद JDU LJP द्वारा पहुंचाए गए वोटों के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाया है. LJP के जो पांच चुनाव लड़नेवाले बड़े नेता JDU में शामिल हुए हैं उनको कुल 98,788 वोट मिले थे. इस तरह इन 208 नेताओं के जरिए JDU में आये वोटों का औसत करीब 500 होता है. मतलब एक नेता करीब 500 वोट लेकर JDU में शामिल हुआ है.

विधानसभा चुनाव में 43 सीटों पर सिमट गई

JDU को LJP की वजह से 16 सीटों पर सीधे हार का सामना करना पड़ा था. महनार सीट पर LJP प्रत्याशी रबींद्र कुमार सिंह ने 31,315 मत प्राप्त किए. यहां JDU प्रत्याशी को हार मिली. तेघरा सीट पर LJP को 29,936 मत मिले और यहां JDU प्रत्याशी हार गए. शेरघाटी में LJP प्रत्याशी मुकेश कुमार यादव ने 24,107 वोट प्राप्त किए. यहां JDU प्रत्याशी विनोद प्रसाद यादव को हार मिली. अतरी में चिराग पासवान के उम्मीदवार अरविंद कुमार सिंह ने 25,873 वोट बटोरे और JDU प्रत्याशी के हार का कारण बने.

इसी तरह से मोरवा में LJP प्रत्याशी अभय कुमार सिंह ने 23,884 मत प्राप्त किए। यहां पर भी JDU को हार मिली. महुआ सीट से LJP प्रत्याशी ने 25,146 मत प्राप्त किए और यहां भी JDU प्रत्याशी हार गए. मनिहारी में LJP प्रत्याशी अनिल कुमार उरांव ने 20,441 मत प्राप्त किए और यहां भी JDU को हार मिली है. जगदीशपुर में LJP प्रत्याशी भगवान सिंह कुशवाहा दूसरे स्थान पर रहे. उन्हें 44,525 मत मिले. यहां भी JDU को हार मिली.ओबरा में LJP प्रत्याशी प्रकाश चंद्र को 40,994 वोट मिला और वह दूसरे स्थान पर रहे. JDU प्रत्याशी यहां तीसरे स्थान पर खिसक गया.

इसी तरह से सासाराम में LJP को 21 हजार, करगहर में 17 हजार, चेनारी में 18 हजार, विभूतीनगर में 28,811, दरभंगा ग्रामीण में 17 हजार 605, रघुनाथपुर में 17 हजार 965, महाराजगंज में 18 हजार 278 वोट मिले थे. इन सभी सीटों पर भी JDU को हार का सामना करना पड़ा. इन सीटों पर LJP को मिले कुल वोटों की संख्या करीब 3.88 लाख है.शायद यहीं वजह है कि अपनी पार्टी के 208 नेताओं के JDU में चले जाने के वावजूद चिराग पासवान बेफिक्र हैं.उनका मानना है कि उनके पार्टी के बेकार नेताओं के छटनी का काम JDU ने करके उनके काम को और भी आसान बना दिया है.

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