By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

विशेष : बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, अपराध को रोकने के लिए बने हैं प्रयोगवादी

ये वर्दी सेवा के लिए है, जनता हित सर्वोपरि : डीजीपी

;

- sponsored -

बिहार पुलिस और बिहार के अवाम को,31 जनवरी 2019 को गुप्तेश्वर पांडेय के रूप में नया डीजीपी मिला है।बिहार सरकार ने 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पाण्डेय को, उनकी खास काबिलियत और वर्दी की असली हनक की वजह से, बिहार का नया डीजीपी बनाया था ।डीजीपी का पदभार संभालने से पहले, गुप्तेश्वर पाण्डेय डीजी ट्रेनिंग के पद पर कार्यरत थे ।

[pro_ad_display_adzone id="49226"]

-sponsored-

विशेष : बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, अपराध को रोकने के लिए बने हैं प्रयोगवादी

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार पुलिस और बिहार के अवाम को,31 जनवरी 2019 को गुप्तेश्वर पांडेय के रूप में नया डीजीपी मिला है।बिहार सरकार ने 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पाण्डेय को, उनकी खास काबिलियत और वर्दी की असली हनक की वजह से, बिहार का नया डीजीपी बनाया था ।डीजीपी का पदभार संभालने से पहले, गुप्तेश्वर पाण्डेय डीजी ट्रेनिंग के पद पर कार्यरत थे ।आपको बता दें कि बिहार के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के.एस.द्विवेदी के रिटायरमेंट के बाद,श्री पांडेय ने पदभार संभाला था ।पदभार संभालते ही,गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा था कि अपराध पर नकेल कसना उनकी पहली प्राथमिकता होगी ।इसके लिए वह एक टीम बनाएंगे जिसमें सारे सीनियर आईपीएस अधिकारी रहेंगे ।उन्होंने कहा था कि काम में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारी और कर्मी,सीधे नपेंगे ।कोई पैरवी और पैगाम,कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा ।आपको यह बताना जरूरी है कि डीजीपी की नियुक्ति नए प्रावधान के मुताबिक हुई है ।नए प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार के पास सीमित अधिकार हैं और बिहार कैडर से डीजी रैंक के 12 अफसरों के नाम यूपीएससी को भेजे गये थे,जिनमें से गुप्तेश्वर पांडेय के नाम पर मुहर लगाई गई थी ।सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाईन की वजह से यह पहली बार हुआ था कि डीजीपी की नियुक्ति के निर्णय को लेकर काफी समय लगा ।सुप्रीम कोर्ट के गाईड लाईन के अनुसार अब राज्य में जो भी डीजीपी बनेंगे,उनका कार्यकाल 2 वर्षों तक का होगा ।

सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाईन की वजह से,उस समय यूपीएससी और बिहार सरकार के बीच काफी माथापच्ची हुई थी ।बिहार के पुलिस महानिदेशक,गुप्तेश्वर पांडेय बिहार पुलिस प्रमुख बनने के बाद से ही लगातार सुर्खियों में रहे हैं । गुप्तेश्वर पांडेय के एक बाद एक,कई फैसलों ने बिहार पुलिस के वरीय अधिकारियों की नींद उड़ा कर रखे हुए है ।डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का राज्य के किसी भी थाने से लेकर एस.एस.पी. ऑफिस तक अचानक ही पहुंच जाना और तरह-तरह की तहकीकात,अब पुरानी बात हो गई है ।बीते दिनों उन्होंने राज्य के सभी वरीय पुलिस अधिकारियों को एक नया फरमान सुना दिया । इसके अनुसार अब बिहार पुलिस के वरीय अधिकारियों को बिना वर्दी पहने कार्यालय जाना महंगा पड़ सकता है ।अगर बिना वर्दी पहने,कोई अधिकरी पुलिस मुख्यालय आए,तो उनपर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है । गुप्तेश्वर पांडेय ने हाल ही में अपने ही विभाग पर सवाल उठाते हुए, अपने फेसबुक वॉल के माध्यम से कहा था कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मी,उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं ।

Also Read
[pro_ad_display_adzone id="49171"]

-sponsored-

बिहार पुलिस के ए.डी.जे. मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने राज्य के सभी एस.पी.,एस.एस.पी., डी.आई.जी. और आई.जी. को आदेश जारी किया था कि वे वर्दी पहन कर ही दफ्तर पहुंचे ।बता दें कि आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय का बिहार पुलिस प्रमुख बनने के बाद से ही बिहार पुलिस सुर्खियों में रह रही है ।समय-समय पर डीजीपी के किसी ना किसी नए फैसले से,बिहार पुलिस को लेकर चर्चा जरूर हो रही है ।गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने ही विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं ।उनके औचक निरीक्षण से कुछ अधिकारियों को तकलीफ हो रही है ।इसी वजह से उनके खिलाफ तरह-तरह की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं ।डीजीपी गुप्तेशर पांडेय ने हाल ही में मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि मुट्ठी भर अपराधी,बिहार के लिए चुनौती बने हुए हैं ।अगर पुलिस अधिकारी चाह लें,तो एक हफ्ते के अंदर अपराध पर लगाम लग सकता है ।इससे बिहार पुलिस की बिगड़ी हुई छवि भी सुधर सकती है ।गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा था कि इसके लिए पुलिस को एक्शन में आना होगा ।अपराधियों का मनोबल तोड़ने के लिए ही वे रात को औचक निरीक्षण पर निकलते हैं ।जिस थाने में गड़बड़ी मिलती है,उसको लेकर एस.पी.,डी.आई.जी. और आई.जी. को,वे बताते हैं ।

बताना लाजिमी है कि डीजीपी की प्रोएक्टिवनेस के बाद भी पुलिसकर्मी थाने से नदारद पाए जा रहे हैं। अभी हाल ही में डीजीपी ने भागलपुर जिले के एक थाने की पूरी टीम को ड्यूटी में गड़बड़ी करने के आरोप में निलंबित कर दिया था ।डीजीपी ने जब थाने का औचक निरीक्षण किया तो वहां पर भारी गड़बड़ी मिली। थाने के अधिकतर पुलिसकर्मी ड्यूटी से नदारद थे। इसी तरह गुप्तेश्वर पांडेय, बीते दिनों, अचानक बेगूसराय पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए। रात को पौने 11 बजे एस.पी. ऑफिस पहुंचने की भनक जैसे ही एस.पी. को लगी आनन-फानन में वे पुलिस मुख्यालय पहुंचे। अफरा-तफरी के बीच जिले के सभी वरीय पुलिस अधिकारी भी एस.पी. ऑफिस पहुंचे ।मौके पर डी.आई.जी. विकास वैभव, बेगूसराय एस.पी. अवकाश कुमार सहित सभी डी.एस.पी.,पुलिस इंस्पेक्टर एवं थाना अध्यक्ष मौजूद थे ।देर रात तक डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय द्वारा मीटिंग का सिलसिला चलता रहा था ।आजकल सूबे के पुलिस विभाग में एक नया नारा गूँज रहा है कि “डी.जी.पी. ने ठाना है,अपराध मुक्त बिहार बनाना है” ।

इसमे कोई शक नहीं है कि किसी भी प्रदेश के पुलिस महानिदेशक चाह लें तो अपराध अपने निम्नतम स्तर तक आ सकता है ।और रही बात वर्तमान पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय की तो इनका ट्रैक रिकॉर्ड बाढ़ डी.एस.पी.के रूप में पहली पोस्टिंग के साथ ही देखा जा सकता है ।जब वे यहाँ के तत्कालीन अपराधियों पर कहर बनकर टूटे थे ।मुझे आज भी एक वाकया याद है,श्री पांडेय बेगुसराय के एस.पी.थे ।उस समय बेगुसराय की जनता खौफ के साये में जी रही थी ।आये दिन अपहरण और हत्याएँ हो रही थी ।अपराधी मानो समानांतर सरकार चला रहे थे ।कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी ।ऐसे में जिले के पुलिस कप्तान बनकर गुप्तेश्वर पांडेय आये और कुछ ही दिनों में लोगों को ये लगने लगा कि कानून और इंसाफ जिंदा है ।उन्होंने कई कुख्यात अपराधियों का सीधे एनकाउंटर किया ।अपराधियों में ऐसा खौफ कायम हुआ कि उनके नाम से अपराधी थर-थर कांपने लगे ।उन्होंने संगठित आपराधिक गिरोहों को ध्वस्त कर दिया ।जो बचे,वे जान बचाकर अन्य प्रदेश भाग खड़े हुये ।बेगुसराय से मिली प्रसिद्धि और कार्य-कौशल की संजीवनी उन्हें सदैव काम आई । फिर वे जिस जिस,जिले में गये अपराधी पहले से सावधान हो गये और अपनी गतिविधियों को लगाम दे दिया,क्योंकि उन्हें पता था कि गुप्तेश्वर पांडेय अपराध और अपराधियों के प्रति अत्यंत कठोर और जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने वाले पुलिस अधिकारी हैं ।

उनकी इसी कार्यशैली ने उन्हें ए.डी.जी. से डी.जी.,बी.एम.पी. तक पहुंचाया । जब वे डी.जी.,बी.एम.पी. बने तो समाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर रुचि लेने लगे ।उन्होंने शराबबंदी के खिलाफ पूरे सूबे में घूम-घूम कर,जन जागरण अभियान चलाया और लोगों को खूब जागरूक किया ।ये पहला अवसर था,जब देश मे कोई आई.पी.एस. इस तरह का अभियान चला रहा था ।इनके इस अभियान को आम जनता से लेकर मीडिया ने भी काफी सराहा ।डीजीपी का पदभार संभालते ही,उन्होंने कई वीडियो सन्देश जारी कर पुलिस अधिकारियों और कर्मियों से अपील किया कि वे जनता से फ्रेंडली व्यवहार करें ।साथ ही जनता से अनुरोध किया कि वे भी पुलिस की भरपूर मदद करें । इतना ही नहीं,उन्होंने दो व्हाट्सएप नंबर भी जारी किये, जिस पर समाज में हो रहे अपराध और व्यक्तिगत पीड़ा की सूचना सीधे डी.जी.पी. तक पहुंचाई जा सके ।

इसके साथ ही उनके बारे में ये भी प्रचलित है कि वे कब किस जिले में और कहाँ चले जायें,किस वक्त निरीक्षण को पहुँच जाएँ,ये कोई नही जानता है ।वे जब भी कहीं निकलते हैं बिना किसी सूचना के और यही कारण है कि अबतक कई पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है ।उन्होंने पुलिस कर्मियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि हर हाल में अपराध को रोकना है और इसे निम्नतम स्तर तक लाना है ।जिस थाना क्षेत्र में कोई अपराध होता है,तो इसके लिए सीधे थानेदार जिम्मेदार होंगे ।किसी भी संगीन अपराध का,अनुसंधानकर्ता,खुद थानाध्यक्ष को ही बनना पड़ेगा । गुप्तेश्वर पांडेय के पुलिस कैरियर में इससे पहले भी कई मौके रहे हैं,जब उन्होंने लोगों को खूब चौंकाया है ।मार्च,2009 को गुप्तेश्वर पांडेय के एक फैसले ने तब सबको चौंका दिया था,जब उन्होंने पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ले ली थी ।इस रिटायरमेंट के बाद लोगों को हैरानी तब हुई,जब वो ठीक नौ महीने बाद,फिर से पुलिस सेवा में शामिल हो गए ।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में ये पहली बार हुआ था कि खुद से रिटायरमेंट लेने के बाद,एक अफसर को,वापस सेवा में फिर से बहाल किया गया ।मजबूत सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक,गुप्तेश्वर पांडे बक्सर से चुनाव लड़ना चाहते थे और उन्हें टिकट का भरोसा भी मिला था लेकिन बाद में बात नहीं बनी और तब उन्होंने फिर से सेवा में वापस आने की अर्जी लगाई ।गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के बिहार कैडर के आई.पी.एस. अधिकारी हैं ।इनका पैतृक घर बिहार के बक्सर जिले में है । जम्मू-कश्मीर के बारामूला में आतंकियों को ढ़ेर करने के बाद, शहीद होनेवाले सी.आर.पी.एफ. जवान रमेश रंजन का पार्थिव शरीर 6 फरवरी को पटना एयरपोर्ट पहुंचने पर बिहार सरकार के मंत्री समेत प्रदेश के वरीय अधिकारियों ने पुष्प अर्पित कर,अमर शहीद को श्रद्धांजलि दी ।शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचते ही ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर रमेश रंजन अमर रहे’ के नारे से पटना एयरपोर्ट परिसर गूंज उठा ।डीजीपी ने शहीद के पार्थिव शरीर को कंधा देकर सड़क मार्ग से पैतृक गांव के लिए रवाना किया ।

पटना एयरपोर्ट पर शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए बिहार सरकार के मंत्री समेत, प्रदेश के वरीय अधिकारियों के साथ-साथ सीआरपीएफ के वरीय अधिकारी मौजूद थे ।प्रदेश के मंत्री नंदकिशोर यादव,पूर्व मंत्री कांति सिंह,गृह सचिव आमिर सुबहानी,डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि के अलावा सीआरपीएफ के आई.जी.,डी.आई.जी. ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने खुद शहीद जवान रमेश रंजन के पार्थिव शरीर को कंधा दिया ।पटना एयरपोर्ट पर शहीद रमेश रंजन के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के बाद सड़क मार्ग से पैतृक गांव भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड क्षेत्र की बभनियाव पंचायत के देव टोला के लिए रवाना कर दिया गया ।पैतृक गांव पहुंचने पर शहीद के पार्थिव शरीर का पुलिस सम्मान के साथ,7 फरवरी को अंतिम संस्कार किया जायेगा । भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड क्षेत्र की बभनियाव पंचायत के देव टोला के रहने वाले दिवंगत शाहिद रमेश के पिता राधामोहन सिंह ने कहा कि “मुझे अपने शहीद बेटे पर गर्व है” ,साथ ही उन्होंने कहा कि ‘केंद्र सरकार कश्मीर में ऐसा काम करे कि वहां जड़ से आतंकवाद मिट जाए, जिससे मेरे बेटे जैसा देश का कोई और बेटा शहीद नहीं हो ।

भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड क्षेत्र की बभनियाव पंचायत के देव टोला निवासी राधामोहन सिंह और सुमित्रा देवी के सबसे छोटे लाल रमेश रंजन,चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे ।साल 2011 में वह सीआरपीएफ की 73 वीं बटालियन में भर्ती हुए थे । दिवंगत शहीद रमेश के पिता राधामोहन सिंह बिहार पुलिस के सब इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं ।बड़े भाई राजेश कुमार गांव में खेती करते हैं ।वहीं,दूसरे और तीसरे नंबर के राजीव रंजन और रितेश रंजन दिल्ली में इंजीनियर हैं ।रमेश का विवाह फरवरी 2016 में गुड़ी सरैया गांव निवासी विजय सिंह की बेटी बेबी देवी के साथ हुई थी ।दिवंगत रमेश रंजन,एक माह की छुट्टी पर 20 नवंबर, 2019 को अपने पैतृक गांव आये थे ।छुट्टी खत्म होने पर वह 22 दिसंबर को ड्यूटी पर लौट गये थे ।रमेश रंजन के शहीद होने की सूचना,उनके दोस्त ने पिता राधामोहन सिंह को 5 फरवरी को,दोपहर करीब 12 बजे मोबाइल पर दी थी ।सूचना मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया । रमेश की पत्नी बेबी देवी,अभी अपने रिश्तेदार के यहाँ कोलकाता में हैं ।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने शहीद सेना के जवान को कांधा देकर,एक मिशाल कायम की है ।गुप्तेश्वर पांडेय ने देश के जवानों की वर्दी और खाकी को जोड़ने का प्रयास किया है ।गुप्तेश्वर पांडेय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्हें अपने पद का जरा भी गुमान नहीं है ।वे पुलिस वालों के साथ-साथ आम जनता से जब भी संवाद करते हैं,तो उनके सनातनी संस्कार से लैस शब्द और वाक्य,बेहद मंत्रमुग्ध करता है। सरल,शौम्य,शालीन और भावपूर्ण तराशी हुई भाषा शैली,उन्हें उद्द्भट विद्वान भी बनाता है। एक डीजीपी आचरण, चरित्र,जीवन वृत्तियों, संस्कार, कृत्य और मौलिकताओं को उद्धेलित करे,यह बेहद खास और विराट व्यक्तित्व की निशानी है। सही मायने में बिहार को एक दार्शनिक और विचारक डीजीपी मिला है,जो अपराध को जड़ से खत्म करना चाहते हैं ।मोटे तौर पर,हम डीजीपी का महिमामंडन नहीं कर रहे हैं बल्कि उनके जनता सर्वोपरि के मानक को,बेहतर पुलिसिंग का जरिया समझ रहे हैं ।पुलिस वालों की झिड़कियों से परेशानहाल जनता को राज्य का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी,सम्मान के साथ न्याय दिलाने में जुटा है,यह कालजयी और विराट व्यक्तित्व का स्खलन है। वर्दी की अकड़ की जगह,वर्दी की हनक,इस अधिकारी को, निसन्देह बड़ा बना रहा है ।पीटीएन मीडिया ग्रुप के मैनेजिंग एडिटर मुकेश कुमार सिंह की खास रिपोर्ट पीटीएन मीडिया ग्रुप के मैनेजिंग एडिटर मुकेश कुमार सिंह की खास रिपोर्ट

-sponsered-

;

-sponsored-

Comments are closed.