By, Shrikant Pratyush
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तेजप्रताप के तेवर से शंट हुए जगदानंद सिंह, बाजी पलटी तो लंबी चुप्पी साध गये आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष

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जगदानंद सिंह को आरजेडी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो लगातार यह कहा जाता रहा कि जगदानंद सिंह आरजेडी को पुराने ढर्रे से उतारकर नये ढर्रे पर ले जाना चाहते हैं। आमलोगों में आरजेडी के कार्यकर्ताओं और उनकी कार्यशैली को लेकर जो छवि है वो बदलना चाहते हैं और आरजेडी जिस चीज के लिए सबसे ज्यादा बदनाम है उसे वे पार्टी में पुख्ता तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। यानि अनुशासन।

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तेजप्रताप के तेवर से शंट हुए जगदानंद सिंह, बाजी पलटी तो लंबी चुप्पी साध गये आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष

सिटी पोस्ट लाइवः जगदानंद सिंह को आरजेडी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो लगातार यह कहा जाता रहा कि जगदानंद सिंह आरजेडी को पुराने ढर्रे से उतारकर नये ढर्रे पर ले जाना चाहते हैं। आमलोगों में आरजेडी के कार्यकर्ताओं और उनकी कार्यशैली को लेकर जो छवि है वो बदलना चाहते हैं और आरजेडी जिस चीज के लिए सबसे ज्यादा बदनाम है उसे वे पार्टी में पुख्ता तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। यानि अनुशासन। स्वभाव और मिजाज से बेहद अनुशासनप्रिय जगदानंद सिंह ने कोशिश शुरू भी की। लेकिन उनकी कार्यशैली पार्टी के हीं बड़े नेताओं को रास नहीं आयी। अपने तरीके से काम करने वाले जगदानंद सिंह को काम का यह तरीका कई बार भारी पड़ा है। पहले रघुवंश प्रसाद सिंह नाराज हुए और उनके अनुशासन पर सवाल उठाया तो जगदानंद सिंह बैकफुट पर नजर आए और अब जब तेजप्रताप यादव ने लालू से मिलकर बाजी पलट दी है तो वे शंट हैं और संभवतः तेजप्रताप यादव के तेवर को देखकर डरे भी हुए हैं।

पार्टी सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक दो मामले हैं जिसको लेकर जगदानंद सिंह और तेजप्रताप यादव के बीच ठनी हुई है। पहला मामला है आरजेडी के जिलाध्यक्षों के नाम के एलान का जो कल हीं यानि 5 फरवरी को होना था लेकिन यह एलान टल गया। खबर आयी कि चूंकी तेजस्वी यादव दिल्ली से पटना नहीं पहुंच सके इसलिए एलान नहीं हो सका। लेकिन सूत्रों की माने तो मामला कुछ और हीं है। दरअसल जिलाध्यक्षों की नई लिस्ट में जगदानंद सिंह तेजप्रताप के करीबियों की छुट्टी चाहते थे। उनके सबसे करीबी देवमुनी सिंह यादव की भी जिलाध्यक्ष पद से छुट्टी तय मानी जा रही थी। अंदाज और मिजाज के मुताबिक तेजप्रताप ने इसे अपनी साख का सवाल बना लिया और रांची के लिए उड़ गये। रिम्स जाकर पिता लालू से मुलाकात की और अपने करीबियों को जिलाध्यक्ष पद पर बनाने या बनाये रखने के लिए मनाने में कामयाब रहे।

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जाहिर है ऐसे संभव नहीं था कि वे नाम घोषित किये जाए जो जगदानंद सिंह ने तय किये हैं यानि तेजप्रताप यादव और लालू की मुलाकात ने बाजी पलट दी और जगदानंद सिंह जिलाध्यक्षों के नाम का एलान नहीं कर पाये जबकि जगदानंद सिंह ने हीं एलान किया था कि वे हर हाल में 5 फरवरी को जिलाध्यक्षों के नाम का एलान करेंगे। दूसरा मामला है छात्र आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर आकाश यादव को बिठाने का। तेजप्रताप यादव चाहते हैं कि आकाश यादव के हाथों में छात्र आरजेडी की कमान दी जाए। तेजप्रताप खुद छात्र आरजेडी के प्रभारी हैं ऐसे में उन्हें यह नागवार गुजरा है कि छात्र आरजेडी की कमान सृजन स्वराज के हाथो में। इन दो मसलों की वजह से तेजप्रताप और जगदानंद सिंह में ठनी हुई है। जगदानंद सिंह मीडिया से बातचीत भी नहीं कर रहे हैं और ना हीं उनका कोई बयान इन चीजों को लेकर सामने आया है। बहरहाल तेजप्रताप यादव के तेवर से साफ हैं कि पार्टी में उनका जलवा कायम है और उनकी डिमांड को नजरअंदाज करना जगदानंद सिंह या पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं के लिए आसान नहीं होगा।

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