By, Shrikant Pratyush
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वशिष्ठ नारायण के गांव में आज भी दो नेताओं को किया जाता है याद, जानिये क्यों?

लालू प्र. और नरेन्द्र सिंह को आज भी भूले नहीं हैं बसंतपुर के लोग

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भोजपुर जिले के बसंतपुर में जहाँ देश के जानेमाने  गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) का जन्म हुआ, वहां कल से ही लोगों का पहुँचने का सिलसिला जारी है. वशिष्ठ नारायण सिंह के  शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन होने के बाद लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके गावं पहुँच रहे हैं.

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वशिष्ठ नारायण के गावं में आज भी दो नेताओं को किया जाता है याद,जानिये क्यों?

सिटी पोस्ट लाइव : भोजपुर जिले के बसंतपुर में जहाँ देश के जानेमाने  गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) का जन्म हुआ, वहां कल से ही लोगों का पहुँचने का सिलसिला जारी है. वशिष्ठ नारायण सिंह के  शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन होने के बाद लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके गावं पहुँच रहे हैं. लेकिन सबकी जुबान पर दो ही नेता का नाम है. एक नाम है जेडीयू के नेता पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह का और दूसरा नाम लालू यादव का. वशिष्ठ बाबू के पैतृक गांव भोजपुर (Bhojpur) जिले के बसंतपुर में उन्हें श्रद्धांजलि देने के पहुँच रहे लोगों के बीच आज इन्हीं दो नेताओं के बारे में चर्चा हो रही है.

दरअसल लालू यादव जब बिहार के मुख्यमंत्री थे तो वशिष्ठ बाबू के  नाम पर उन्होंने कुछ ऐसे काम किए जो आज भी स्मरणीय हैं. वर्ष 1989 में लापता होने के बाद जब 1993 में छपरा के डोरीगंज से भिखारी जैसी हालात मिले गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह को उनके परिजन घर ले आए तो लालू प्रसाद उनसे मिलने बसंतपुर पहुंचे थे. लालू प्रसाद तब इतने भावुक हो गए थे  कि उन्होंने कहा था कि बिहार को हमें भले ही बंधक रखना पड़े, हम महान गणितज्ञ का इलाज विदेश तक कराएंगे.लालू प्रसाद ने 1994 में ही वशिष्ठ बाबू को बेहतर इलाज के लिए बंगलुरू स्थित निमहंस अस्पताल में सरकारी खर्चे पर भर्ती कराया जहां 1997 तक उनका इलाज चला. इससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वहां से वे अपने गांव बसंतपुर लौट आए थे.

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गांव के लोग इस बात को भी नहीं भूलते हैं कि आइंस्टीन की सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देने वाले इस गणितज्ञ को ढूंढ़ने वाले 5 लोगों को लालू प्रसाद यादव की पहल पर नौकरी मिली थी. यही नहीं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में वर्ष 2005 से कुछ सालों तक स्नातकोत्तर गणित में प्रथम स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को वशिष्ठ नारायण स्वर्ण पदक से अलंकृत किया जा रहा था. हाल के वर्षों में इसे बंद कर दिया गया है.

ग्रामीण बताते हैं कि गांव के सुदामा पासवान व कमलेश पासवान सारण जिले में अपनी बहन की शादी में फर्नीचर खरीदने के लिए गए थे. इस दौरान डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर फेंके गये जूठन में खाना तलाशते दोनों ने देख लिया. सूचना पर परिजन व मित्र सारण के डोरीगंज पहुंचे और उन्हें घर ले आए. तब नरेन्द्र सिंह ने चंदा जुटाकर बशिष्ठ नारायण के परिवार की मदद की थी. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि जब उन्हें बशिष्ठ नारायण के बारे में पता चला वो तुरत उनके गावं पहुंचे.उनके समाज के सैकड़ों भी पहुँच गए.फिर क्या था बशिष्ठ नारायण सिंह के लिए चंदा जुटाया गया.नरेन्द्र सिंह का दावा है कि उनके बाद ही लालू यादव का ध्यान बशिष्ठ नारायण की तरफ गया और वो मदद के लिए आगे आये.

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