By, Shrikant Pratyush
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“विशेष” : अब शरद यादव के मन में पल रही है पीएम बनने की ईच्छा

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लालू प्रसाद यादव के जेल में रहने की वजह से तेजस्वी यादव लोकसभा चुनाव के असली महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं। नीतीश कुमार के सहयोग और जातीय समीकरण सहित अल्पसंख्यकों के दम पर राजद पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी टूटती साँसों को ना केवल बचाने में कामयाब हुआ बल्कि बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी सामने आया।

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“विशेष” : अब शरद यादव के मन में पल रही है पीएम बनने की ईच्छा

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : बिहार में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे में रार अभी तक बरकरार है। अभीतक यह साफ नहीं हो पाया है कि महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद कांग्रेस, रालोसपा, लोजद, हम, मुकेश सहनी की पार्टी और वाम मोर्चा को कितनी सीटें देने जा रहा है। लालू प्रसाद यादव के जेल में रहने की वजह से तेजस्वी यादव लोकसभा चुनाव के असली महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं। नीतीश कुमार के सहयोग और जातीय समीकरण सहित अल्पसंख्यकों के दम पर राजद पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी टूटती साँसों को ना केवल बचाने में कामयाब हुआ बल्कि बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी सामने आया। अगर नीतीश कुमार पिछले विधानसभा चुनाव में अगर एनडीए के साथ होते, तो आज राजद नाम की कोई पार्टी है, इसका कोई नामोनिशान तक नहीं होता।

नीतीश कुमार के सहारे बिहार में कांग्रेस के भी दिन बहुरे और उसमें भो असीम ताकत आयी। अब राजद खुद को बिहार का नायक समझने की खुशफहमी पाल बैठा है। सीट बंटवारे के पेंच अभीतक फंसे हुए हैं। शिवहर सीट को लेकर सहरसा जेल में बीते 12 साल से बन्द आनंद मोहन ने साफ लहजे में मुनादी करते हुए कहा है कि अगर शिवहर सीट से उनकी पत्नी लवली आनंद को कांग्रेस के टिकट से चुनाव नहीं लड़ाया गया, तो पूरे बिहार में वे महागठबंधन की ईंट से ईंट बजाकर रख देंगे। जेल में रहने से उनका जनाधार कम नहीं हुआ है। आनंद मोहन ने दावे के साथ कहा है कि उनके सम्मान से छेड़छाड़ और उनकी राजनीतिक हैसियत को कम आंकने की गुस्ताखी महागठबंधन के लिए बड़ा सदमा और सबक साबित होगा।

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इधर मधेपरा सीट से चुनाव लड़ने वाले शरद यादव कहते हैं जीत के बाद प्रधानमंत्री कौन होंगे का फैसला महागठबंधन के बड़े नेता मिल-बैठकर तय करेंगे। शरद यादव के इस बयान में इस बात का संदेश है कि वे भी पीएम मेटेरियल हैं। देश के सबसे पुराने सांसद शरद यादव को भी देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पसंद आ गयी है। वे खुलकर यह बयान नहीं दे रहे हैं लेकिन सभी चुनाव परिणाम बाद प्रधानमंत्री को लेकर फैसला लेंगे, यह साफ कर रहा है कि तत्काल राहुल गांधी बतौर प्रधानमंत्री सभी की पसंद नहीं हैं। वैसे अभी लोकसभा चुनाव की महज घोषणा हुई है। चुनाव में अभी वक्त है। कौन-कौन उम्मीदवार कहाँ से चुनाव लड़ेंगे और किसको जीत मिलती है और किसे हार को गले लगाना पड़ता है,यह देखने में अभी वक्त लगेंगे। लेकिन विभिन्य मंचों से और इंटरव्यू के दौरान शरद यादव का यह बोलना की अभी प्रधानमंत्री कौन होंगे यह तय नहीं है।

महागठबंधन की जीत के बाद इस मसले पर विचार किया जाएगा ।जब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस राहुल गांधी को बतौर प्रधानमंत्री का दावेदार बताकर चुनावी समर में उतर रही है तो, फिर शरद यादव और महागठबंधन के अन्य नेताओं को इसपर आपत्ति क्यों है? वैसे जेल में बन्द लालू प्रसाद यादव की मंसा भी यही है कि शरद यादव ही देश के नए प्रधानमंत्री बनें। लेकिन आने वाले समय में चुनाव परिणाम ही सभी कुछ तय करेगा। वैसे यह साफ है कि कांग्रेस राहुल गांधी की जगह किसी भी चेहरा को प्रधानमंत्री स्वीकारने को तैयार नहीं होगी। आखिर में हम यह महागठबंधन के भीतरखाने से मिल रही सूचना के आधार पर पूरे यकीन के साथ कह रहे हैं कि शरद यादव प्रधानमंत्री बनने के सपने सोते और जागते देख रहे हैं। यूँ ऊंट किस करवट बैठता है,यह सबकुछ जनता-जनार्दन के हाथों है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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