By, Shrikant Pratyush
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बड़े नेताओं के बयानों को हल्का बना रहे तेजस्वी, नीतीश के नाम पर बंट गयी है आरजेडी?

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क्या नीतीश कुमार के नाम पर आरजेडी बंट गयी है? यह सवाल बहुत वाजिब इसलिए है क्योंकि एक तरफ आरजेडी के कई बड़े और बुजुर्ग नेता यह मानते रहे हैं कि नीतीश महागठबंधन की जरूरत हैं और अगर वे आरजेडी के साथ हाथ मिला लें तो बीजेपी के खिलाफ लड़ाई आसान हो जाएगी।

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बड़े नेताओं के बयानों को हल्का बना रहे तेजस्वी, नीतीश के नाम पर बंट गयी है आरजेडी?

सिटी पोस्ट लाइवः क्या नीतीश कुमार के नाम पर आरजेडी बंट गयी है? यह सवाल बहुत वाजिब इसलिए है क्योंकि एक तरफ आरजेडी के कई बड़े और बुजुर्ग नेता यह मानते रहे हैं कि नीतीश महागठबंधन की जरूरत हैं और अगर वे आरजेडी के साथ हाथ मिला लें तो बीजेपी के खिलाफ लड़ाई आसान हो जाएगी। ऐसा मानने वाले नेताओं में रघुवंश प्रसाद सिंह का नाम सबसे शीर्ष पर है। अब्दुल बारी सिद्धकी और और शिवानंद तिवारी की राय भी कमोबेश यही रही है। अब्दुल बारी सिद्धकी तेजस्वी यादव को पार्टी के बड़े नेताओं की मंशा पर सवाल न उठाने और इगो छोड़ने की नसीहत दे चुके हैं।

शिवानंद तिवारी तो राजनीति से सन्यास ले चुके हैं लेकिन सन्यास से पहले उन्होंने तेजस्वी को यह नसीहत जरूर दी थी कि नीतीश कुमार के लिए इतने कड़े शब्दों का प्रयोग न करें जैसा वो करते रहते हैं। दो दिन पहले रघुवंश प्रसाद सिंह ने फिर दुहराया कि नीतीश कुमार आरजेडी के साथ आ सकते हैं और बातचीत चल रही है। रघुवंश प्रसाद सिंह ने यह भी कहा कि अगर नीतीश साथ आते हैं तो बीजेपी को पछाड़ना आसान हो जाएगा। रघुवंश प्रसाद सरीखे पार्टी के बड़े नेता के बयान को तेजस्वी खारिज करते रहे हैं। इस बयान के उलट भी उन्होंने नीतीश कुमार पर कई तगड़े हमले किये।

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इसलिए सवाल है कि क्या नीतीश कुमार को लेकर आरजेडी बंट गयी है जिसमें पार्टी का एक धड़ा जो तेजस्वी यादव के आसपास के लोग हैं वो मानता है कि नीतीश को महागठबंधन में एंट्री नहीं मिलनी चाहिए और नीतीश के साथ रहने पर तेजस्वी का सीएम बनना भी मुश्किल है जबकि दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की जमात यह मानती है कि तेजस्वी को सीएम बनाने से ज्यादा जरूरी बीजेपी को बिहार की सत्ता से दूर रखना है। लगता भी ऐसा हीं है कि आरजेडी बंट गयी है और आरजेडी बंटी नजर आ रही है। तभी तो तेजस्वी लगातार न सिर्फ नीतीश कुमार को नो एंट्री का बोर्ड दिखाते हैं बल्कि उन पर ताबड़तोड़ हमले भी करते हैं इसके उलट आरजेडी के बड़े नेता नीतीश कुमार को महागठबध्ंान के लिए जरूरी मानते हैं।

रघुवंश प्रसाद सिंह सरीखे नेता नीतीश को बीजेपी के खिलाफ लड़ाई का अचूक हथियार मानते हैं। शिवानंद तिवारी भले हीं राजनीति से सन्यास ले चुके हैं लेकिन वो यह भी कह चुके हैं कि पीएम मोदी और बीजेपी को कोई टक्कर दे सकता है तो वो नीतीश कुमार हीं हैं। उपेन्द्र कुशवाहा को छोड़ दें तो महागठबंधन के दूसरे सहयोगी दलों को नीतीश से बहुत परहेज है ऐसा दिखता नहीं है इसलिए रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान के बाद इस सवाल ने भी जन्म लिया है कि नीतीश के नाम पर आरजेडी के बंटने के संकेत तो मिलते रहे हैं लेकिन क्या महागठबंधन भी बंटा हुआ है।

बहरहाल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार बीजेपी का साथ छोड़ेंगे ऐसा फिलहाल नजर नहीं आता उसकी सबसे महत्वपूर्ण वजह यह है कि बीजेपी अध्यक्ष और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह यह कह चुके हैं कि नीतीश 2020 में भी एनडीए के कैप्टन होंगे यानि 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। जाहिर है जब बीजेपी नीतीश को कैप्टन मान हीं रही है तो वो बीजेपी से अलग क्यों होंगे। लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह सरीखे आरजेडी के नेता में नीतीश को साथ लाने की आतुरता दिखायी देती है और यही आतुरता नीतीश के नाम पर आरजेडी और महागठबंधन के बंटने के संकेत भी देती है।

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