By, Shrikant Pratyush
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फैसला लेने की बजाय उपेन्द्र कुशवाहा ने नीतीश-BJP पर निकाली जमकर भड़ास

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा-बिहार की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लेना है

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उपेन्द्र कुशवाहा NDA छोड़ने का और महागठबंधन में जाने का एलान करेगें या नहीं, सबकी नजर इसी बात पर टिकी थी. लेकिन सीधे अपना फैसला सुनाने की बजाय सबसे पहले उपेन्द्र कुशवाहा ने केंद्र की बीजेपी सरकार और बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा.

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फैसला लेने की बजाय उपेन्द्र कुशवाहा ने नीतीश-BJP पर निकाली जमकर भड़ास

सिटी पोस्ट लाइव : गांधी की कर्मभूमि चंपारण की धरती बाल्मीकि नगर में रालोसपा पार्टी की राष्ट्रिय कार्यकारिणी की बैठक में NDA में बने रहना है या छोड़ देना है, ये निर्णय लेने के लिए पार्टी सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा को अधिकृत कर दिया गया. आज गुरुवार को मोतिहारी में पार्टी के खुल्ला अधिवेशन में उपेन्द्र कुशवाहा अपना फैसला सुनाने वाले थे.उनकी पार्टी से लेकर प्रदेश से लेकर देश के नेताओं की नजर उपेन्द्र कुशवाहा पर टिकी थी. उपेन्द्र कुशवाहा NDA छोड़ने का और महागठबंधन में जाने का एलान करेगें या नहीं, सबकी नजर इसी बात पर टिकी थी. लेकिन सीधे अपना फैसला सुनाने की बजाय सबसे पहले उपेन्द्र कुशवाहा ने केंद्र की बीजेपी सरकार और बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से वो जिनके  नेत्रित्व में ( मोदी सरकार )  काम कर रहे थे ,अब लग रहा है ,वो अपने सपने को साकार नहीं कर पाए.कोई फल नहीं मिला .

उपेन्द्र कुशवाहा ने लालू राबडी के साशन काल की चर्चा करते हुए  कहा कि 15 साल पहले जो परिस्थिति थी, उससे लोग बाहर निकलना चाहते थे. वो बेचैन थे और इसी लिए उन्होंने बदलाव के लिए नयी  सरकार को चुना. हमने भी बदलाव के लिए अपने जवानी का पंद्रह साल दे दिया. लेकिन इस पंद्रह साल में बिहार आगे बढ़ने की बजाय और पंद्रह साल पीछे चला गया. उन्होंने सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था को लेकर नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा . उन्होंने नीतीश कुमार पर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर देने का आरोप नीतीश कुमार पर लगाते हुए कहा कि क्या यहीं नीतीश मॉडल हैं, जहाँ शिक्षकों की कमी है. जहाँ शिक्षक हैं भी तो योग्य  हैं. गरीब बच्चे  सरकारी स्कूलों में बर्बाद हो रहे हैं.गरीब लोगों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ नहीं सकते और सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का कोई स्तर ही नहीं है. उन्होंने अच्छे शिक्षकों को रसोइया और ठेकेदार बना देने और योग्य लोगों को पढ़ाने के काम में लगाकर बिहार की शिक्षा को बर्बाद कर देने का आरोप नीतीश सरकार पर लगाया.उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए उनकी पार्टी ने 25 सूत्री मांग रखी, आन्दोलन चलाया लेकिन नीतीश सरकार ने कुछ नहीं किया.

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सिटीं के तालमेल को लेकर उन्होंने बीजेपी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अमित शाह से कईबार मिलने का प्रयास किया लेकिन समय नहीं मिला. पीएम से संपर्क की कोशिश की लेकिन बात नहीं हुई. दूसरी तरफ बिहार में मेरी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई.ममेरे विधायकों और सांसदों -नेताओं को मंत्री पद का लालच देकर तोड़ने की कोशिश की गई. मैं नीतीश कुमार को अपना बड़ा भाई मानता हूँ .लेकिन नीतीश कुमार ने मुझे नीच कहकर मुझे झकझोर दिया. कुशवाहा ने कहा कि गरीब बच्चों की शिक्षा की बात की तो नीतीश कुमार ने मुझे नीच करार दे दिया.उन्होंने कहा कि जिस तरह से दिल्ली में मुझे नजर-अंदाज किया जा रहा था और बिहार में मेरी पार्टी को बर्बाद करने की साजिश चल रही थी.कुशवाहा ने कहा कि मैंने  अपना सारा मान-अपमान और सीट की चिंता छोड़ केवल शिक्षा को दुरुस्त रखने की अपनी मांग रखी लेकिन उसे भी अनसुना कर दिया.

उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पंद्रह साल के कुशासन से बाहर निकालने के लिए जनता ने जिस नीतीश कुमार को सत्ता में बिठाया, उन्होंने बिहार की कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को और भी चौपट कर दिया.आये दिन हत्या, लूट ,अपहरण की वारदाते हो रही हैं. राजनीतिक नेता कार्यकर्त्ता मारे जा रहे हैं. आज कोई सुरक्षित नहीं है. क्या यहीं सुशासन है? अगर यहीं सुश्सन है तो फिर कुशासन क्या होता है, आप बता दीजिये .उपेन्द्र कुशवाहा ने बीजेपी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि  महंगाई, बेरोजगारी ,शिक्षा को लेकर जनता सवाल नहीं करे ,चुनाव के समय बीजेपी अब मंदिर का मुद्दा उछाल रही है.उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि  मंदिर –मस्जिद बनाने का काम राजनीतिक दलों का काम नहीं होता. राजनीतिक दल का काम है लोगों के लिए शिक्षा,स्वास्थ्य , रोजगार की व्यवस्था करना. उन्होंने कहा कि जिस तरह से चुनाव के समय मंदिर को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है, ये उचित नहीं है. अपने एक घंटे के भाषण में उपेन्द्र कुशवाहा केवल नीतीश सरकार पर बरसते रहे. बीजेपी पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते रहे लेकिन आज भी वो NDA को छोड़ने का फैसला नहीं ले पाए.

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