By, Shrikant Pratyush
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बिहार क्रिकेट को रणजी की मान्यता दिलाने के लिए बोर्ड से इस शख्स ने लड़ी लंबी लड़ाई

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पिच पर पसीना बहाने वाले बिहार के क्रिकेटरों की उम्मीदों एक बार फिर परवान चढ़ने लगी है। क्रिकेट जरिए भविष्य का रास्ता आसान नजर आने लगा है तो इसका श्रेय आदित्य वर्मा को हीं जाता है।

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बिहार क्रिकेट को रणजी की मान्यता दिलाने के लिए बोर्ड से इस शख्स ने लड़ी लंबी लड़ाई

सिटी पोस्ट लाइव : लगभग दो दशक के ज्यादा का वक्त गुजर गया बिहार में क्रिकेट के भविष्य पर छाये अंधेरे को छंटने में। आसान नहीं थी बिहार को उसके अधिकार दिलाने की लड़ाई। लेकिन एक शख्स की जिद ने बिहार क्रिकेट और यहां क्रिकेटरों को उसका हक दिलाया। अधिकार की लंबी लड़ाई लड़ने वाले इस शख्स का नाम है आदित्य वर्मा। 22 सालों बाद बिहार ने रणजी का मैच खेला। पिच पर पसीना बहाने वाले बिहार के क्रिकेटरों की उम्मीदों एक बार फिर परवान चढ़ने लगी है। क्रिकेट जरिए भविष्य का रास्ता आसान नजर आने लगा है तो इसका श्रेय आदित्य वर्मा को हीं जाता है।

बिहार में क्रिकेट की उम्मीदों में जान फूंकने वाले आदित्य वर्मा बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व सचिव हैं। अपना सबकुछ दांव पर लगाकर इन्होंने बिहार को रणजी की मान्यता दिलवाई। आदित्य वर्मा ने बिहार क्रिकेट की मान्यता को लेकर चल रही एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने भावुक होकर बिहार के साथ हो रहे अन्याय की गुहार लगायी थी। उन्होंने आईपीएल में गड़बड़भ् और स्पाॅट फिक्सिंग के खिलाफ भी बड़ी मुहिम चलायी। बहरहाल आज आदित्य वर्मा के प्रयास सार्थक होते दिख रहें।

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बिहार में क्रिकेट का भविष्य उज्जवल होता नजर आ रहा है। बिहार ने 22 सालों के बाद रणजी मैच खेला है। पटना के मोइनुल हक स्टेडिम मेें 28 नवंबर से 1 दिसम्बर तक आयोजित रणजी मैच में बिहार ने सिक्किम की टीम को हराया। लंबे वक्त के बाद बिहार में जब क्रिकेट की उम्मीदें जागी है तो  इस रणजी मैच के दौरान बिहार कि क्रिकेटरों में भी  इन उम्मीदों से उपजा जोशो-खरोश दिखा। आयोजक और खिलाड़ी सब उत्साह से लबरेज था।  इस उत्साह का परिणाम रहा की बिहार ने आगाज जीत के साथ शुरू किया जो बेहतर अंजाम की उम्मीद देती है।

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