By, Shrikant Pratyush
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धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण के लाभ से वंचित करने के मुद्दे पर क्यों चुप हैं सभी विपक्षी दल

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भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड के तमाम विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि धर्मान्तरित आदिवासियों को आरक्षण से वंचित करने के प्रस्ताव पर क्यों ये सभी दल मौन व्रत धारण किए हुए हैं।

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धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण के लाभ से वंचित करने के मुद्दे पर क्यों चुप हैं सभी विपक्षी दल

सिटी पोस्ट लाइव, रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड के तमाम विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि धर्मान्तरित आदिवासियों को आरक्षण से वंचित करने के प्रस्ताव पर क्यों ये सभी दल मौन व्रत धारण किए हुए हैं। शाहदेव ने जानना चाहा कि हजारों वर्षों से अपनी कला, संस्कृति और परंपरा को जिंदा रखने वाले आदिवासी समुदायों के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने चुप्पी क्यों साध रखी है। उन्होंने कहा कि झामुमो के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं लेकिन धर्मान्तरित आदिवासियों को लाभ देने से वंचित करने के मुद्दे पर चुप हो जाते हैं। उन्होंने कहा डॉक्टर अजय कुमार बीच-बीच में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए झारखंड की धरती पर अवतरित होते हैं। लेकिन वह भी इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहते । उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी तो सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राजनीतिक वजूद बचाने का प्रयास कर रहे हैं । लेकिन वह भी इस मुद्दे पर आश्चर्यजनक रूप से खामोश है। शाहदेव ने कहा कि झारखंड के सभी प्रमुख विपक्षी दल ईसाई मिशनरियों के कठपुतली बन नाच रहे हैं। ईसाई धर्म गुरुओं के कहने पर वह राजनीतिक एजेंडा तय करते हैं। लेकिन यहां के स्थानीय आदिवासियों को जब उनके हक़ देने की बात होती है तो वह मुंह मोड़ लेते हैं। उन्होंने कहा की विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले एनजीओ पर जब जांच चल रही थी तो उसे भी इसाई धर्म गुरुओं ने प्रभावित करने के लिए भड़काऊ बयान दिए थे। उस समय भी किसी विपक्षी दल ने इसकी निंदा नहीं की थी। अब जब सीआईडी की प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हो गया है कि विदेश से प्राप्त सहायता राशि का धर्मांतरण के लिए जमकर दुरूपयोग हुआ है तो भी विपक्षी दल चुप है।  शाहदेव ने कहा कि सभी विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ करना चाहिए। हालांकि उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष का स्टैंड साफ लगता है कि वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इस मुद्दे पर अपना मुंह नहीं खोलेंगे। शाहदेव ने विपक्षी दलों को चैलेंज करते हुए कहा कि यहां के तमाम विपक्षी दल स्थानीय आदिवासियों के हित में नहीं सोचते हैं और धर्मान्तरित आदिवासियों के दोहरे लाभ के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने करने की उनकी हिम्मत नहीं है।

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