By, Shrikant Pratyush
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नियोजित शिक्षकों को लगा बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को किया खारिज

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बिहार के नियोजित शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की पुर्नविचार याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि नियोजित शिक्षकों को लेकर दिए गए आदेश में कोई त्रुटि नहीं है इसलिए पुनर्विचार याचिका को खारिज किया जाता है. बता दें बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने अपने पुराने आदेश पर फिर से पुनर्विचार करने की अर्जी लगाई थी.

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नियोजित शिक्षकों को लगा बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को किया खारिज

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के नियोजित शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की पुर्नविचार याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि नियोजित शिक्षकों को लेकर दिए गए आदेश में कोई त्रुटि नहीं है इसलिए पुनर्विचार याचिका को खारिज किया जाता है. बता दें बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने अपने पुराने आदेश पर फिर से पुनर्विचार करने की अर्जी लगाई थी. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन देने के फैसले से इनकार कर दिया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद नियोजित शिक्षकों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षक नियमित आधार पर वेतन पाने के हकदार हैं. समान काम-समान वेतन का केस हारने के  बाद शिक्षकों ने इसे सरकार की साजिश करार दिया था. इतना ही नहीं कुछे दिनों पहले नियोजित शिक्षकों ने पटना में महारैला निकाल सरकार को चेताने की भी कोशिश की थी. जहां 17 अगस्त को जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम हुआ वहीँ अब 5 सितंबर को पटना के गांधी मैदान राज्य स्तरीय प्रदर्शन का कार्यक्रम नियोजित शिक्षकों ने रखा है. नियोजित शिक्षकों के तरफ से चरणबद्ध आंदोलन को देखते हुए सरकार अलर्ट मोड में आ गई है.

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गौरतलब है कि बिहार सरकार बनाम बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के केस में दाखिल किए गए पुनर्विचार याचिका में दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित किए गए न्यायादेश से संविधान के अनुच्छेद 254 का उल्लंघन हुआ है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 यथा संशोधित 1992 में सभी शिक्षकों को समान वेतन और सेवा शर्त देने का निर्देश है. साथ हीं रिव्यू पिटिशन में ओपन कोर्ट की मांग की गई थी. लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने सभी मांगों को खारिज कर दिया है और पहले के आदेश में सुधार करने से इंकार कर दिया है.

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