By, Shrikant Pratyush
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यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर एक और मामला आया सामने, फेसबुक कर रहा ये काम

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Facebook पर एक बार फिर से यूजर्स की प्रिवेसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.हाल ही में आईएक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक द्वारा रखे गए थर्ड पार्टी एम्पलॉयी (कॉन्ट्रैक्टर्स) यूजर्स की ऑडियो क्लिप को सुन रहे थे.

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यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर एक और मामला आया सामने, फेसबुक कर रहा ये काम

सिटी पोस्ट लाइव : Facebook पर एक बार फिर से यूजर्स की प्रिवेसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.हाल ही में आईएक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक द्वारा रखे गए थर्ड पार्टी एम्पलॉयी (कॉन्ट्रैक्टर्स) यूजर्स की ऑडियो क्लिप को सुन रहे थे. वहीं फेसबुक ने ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट को खंडन करते हुए कहा कि उसने ऑडियो क्लिप को रिव्यू करने के लिए इंसानो का इस्तेमाल एक हफ्ते पहले ही बंद कर दिया है. हालांकि, फेसबुक ने माना कि उसने शुरुआत में कुछ कॉन्ट्रैक्टर्स को जरूर हायर किया था ताकि वह मेसेंजर ऐप पर चेक कर सके कि ऑडियो क्लिप को ठीक तरह से ट्रांसक्राइब हो रहे हैं या नहीं.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि फेसबुक साल 2015 से वॉइस क्लिप को टेक्स्ट में बदलने की सहूलियत दे रहा है. यह फीचर बाइ डिफॉल्ट ऑफ ही रहता है. फेसबुक ने कहा कि जिन यूजर्स ने इस फीचर को ऑन को किया था केवल उन्हीं के ऑडियो क्लिप्स को थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स ने रिव्यू किया है. वहीं फेसबुक के सपॉर्ट पेज के मुताबिक अगर चैट करने वाले यूजर्स में से अगर किसी एक ने भी ट्रांस्क्राइबिंग को ऑन रखा है तो पूरी चैट ट्रांसलेट होगी.इसमें चिंता की बात यह है कि फेसबुक के सपॉर्ट पेज या सर्विस इस्तेमाल करने के लिए रखे गए नियम व शर्तों में इस बात का कही जिक्र नहीं है कि फेसूबुक मेसेंजर के ऑडियो क्लिप्स इंसानों द्वारा रिव्यू किए जाएंगे. सपॉर्ट पेज की बात करें तो वहां लिखा है, ‘वॉइस को टेक्स्ट में बदलने के लिए मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जाता है. 

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