सिटी पोस्ट लाइव
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के राजेंद्र नगर में बन रहे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी का दौरा किया और अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। यह साइंस सिटी 21 एकड़ के भूखंड पर बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने साइंस सिटी के अलग-अलग हिस्सों का मुआयना किया और निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए दुनिया के बेहतरीन केंद्रों में से एक होगी। उन्होंने अधिकारियों से आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा ताकि छात्र-छात्राएं विज्ञान के सिद्धांतों को आसानी से समझ सकें।

परियोजना की विशेषताएं और प्रगति
भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने मुख्यमंत्री को बताया कि साइंस सिटी के भवन निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस साइंस सिटी में पाँच बड़ी गैलरी बनाई जा रही हैं, जिनमें विज्ञान से जुड़े प्रदर्शों को दिखाया जाएगा:
• बी ए साइंटिस्ट गैलरी (वैज्ञानिक बनें दीर्घा)
• सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी (सतत ग्रह दीर्घा)
• बेसिक साइंस गैलरी (मूल विज्ञान दीर्घा)
• बॉडी एंड माइंड गैलरी (शरीर और मस्तिष्क दीर्घा)
• एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस गैलरी (खगोल विज्ञान एवं अंतरिक्ष दीर्घा)
उन्होंने बताया कि नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (NCSM) के माध्यम से 75 करोड़ रुपये की लागत से पहले चरण में बी ए साइंटिस्ट गैलरी में 12 और बेसिक साइंस गैलरी में 35 विज्ञान प्रदर्शों को स्थापित करने का काम अंतिम चरण में है।
परियोजना का इतिहास और अन्य सुविधाएं
यह साइंस सिटी विज्ञान, प्रावैधिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा 889 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस परियोजना की परिकल्पना तब की गई थी जब उन्होंने महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से सुझाव मांगे थे। डॉ. कलाम के सम्मान में ही इसका नाम उनके नाम पर रखा गया। इस परियोजना की आधारशिला 1 मार्च 2018 को रखी गई थी।
इस साइंस सिटी में आधुनिक सुविधाओं वाला 500 सीटों का एक प्रेक्षागृह भी बनाया गया है। इसके अलावा, स्कूली छात्रों के लिए 150 बिस्तरों वाला एक डॉरमेट्री भी बनाया गया है ताकि वे यहां रात्रि विश्राम कर सकें। परिसर में एक ओपन-एयर थिएटर, कैफेटेरिया और पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए 150 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल भी लगाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस परियोजना की प्रगति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। उन्होंने इसे विश्वस्तरीय बनाने के लिए अधिकारियों की एक टीम को विदेशों में भी अध्ययन के लिए भेजा था, और मार्च 2024 में उन्होंने खुद लंदन स्थित साइंस सिटी का निरीक्षण किया था।