By, Shrikant Pratyush
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स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो हो जाएं सावधान, कोई चुरा रहा है आपके फोन का डेटा

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क्या आपको पता है कि आप दिनभर किससे क्या बात करते हैं, क्या चैटिंग करते हैं, कहाँ आते जाते हैं, क्या करते हैं सबकुछ आपके फ़ोन में रिकॉर्ड हो रहा है. आपको लगता होगा आपने तो कैमरा ऑन नहीं किया फिर रिकॉर्डिंग कैसे होगा.

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स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो हो जाएं सावधान, कोई चुरा रहा है आपके फोन का डेटा

सिटी पोस्ट लाइव : क्या आपको पता है कि आप दिनभर किससे क्या बात करते हैं, क्या चैटिंग करते हैं, कहाँ आते जाते हैं, क्या करते हैं सबकुछ आपके फ़ोन में रिकॉर्ड हो रहा है. आपको लगता होगा आपने तो कैमरा ऑन नहीं किया फिर रिकॉर्डिंग कैसे होगा. तो आप ये जान लीजिये कि हैकर जासूसी सॉफ्टवेर के जरिये दूर से ही आपके फ़ोन में स्पाईवेयर इंस्टाल कर आपकी सारी निजी सूचनाओं को प्राप्त कर रहा है. ये स्पाईवेयर आपके फ़ोन के कैमरे और माइक्रोफ़ोन तक को नियंत्रित करने की सुविधा हैकर को दे देता है .जितना ये असंभव ये लगता है, उतना ही आसान है.

सबसे पहले आप एक बात जान लीजिये कि आपके स्मार्ट फ़ोन का कैमरा एक आंख की तरह काम करता है  जो सामने घटित होने वाली हर चीज़ देखता है. “ऑपरेटर आपके जीपीएस के सहारे आपको ट्रैक कर सकता है.””वे कभी और कहीं भी आपके कैमरे को ऑन कर सकते हैं और आपके चारो ओर जो घटित हो रहा है उसे रिकॉर्ड कर सकते हैं. आपके पास सोशल मीडिया के जितने ऐप हैं उनके अंदर तक पहुंच बना लेते हैं. इसके मार्फ़त वे आपकी सारी तस्वीरें, सारे संपर्क, आपके कैलेंडर की सूचनाएं, आपके इमेल की सूचनाओं और आपके हर दस्तावेज तक उनकी पहुंच है.”

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“ये सॉफ़्टवेयर आपके फ़ोन को लिसनिंग डिवाइस में बदल देते हैं जो आपको ट्रैक करता है और जो कुछ भी इसमें होता है, वो चुरा लेता है.”स्पाईवेयर सालों से बनते रहे हैं, लेकिन इन नए स्पाईवेयर से हमारे सामने एक पूरी नई दुनिया का रहस्य खुलता है.यात्रा के दौरान ये सॉफ़्वेयर डेटा नहीं पकड़ता, लेकिन जब ये स्थिर होता है, आपके फ़ोन के सारे फंक्शन पर उसका नियंत्रण हो जाता है और टेक्नोलॉजी इतनी अत्याधुनिक है कि इसे पकड़ पाना लगभग नामुमकिन है. कुछ ऐसे साक्ष्यों की जांच पड़ताल अबतक हुई है जिससे पूरी दुनिया भर में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वकीलों के कामों की जासूसी करने के लिए ऐसे सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल किये जाने का खुलासा हुआ है.

लेकिन सवाल उठता है कि ये कौन कर रहा है और क्यों? और अपने जेब में मौजूद इन ख़ुफ़िया सॉफ़्टवेयर से बचने के लिए क्या किया जा सकता है? अब तो सरकारी ख़ुफ़िया एजेंसियां इस सॉफ़्टवेयर के जरिये  चरमपंथियों और संगठित अपराध के ख़िलाफ़ लड़ाई में हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं.सुरक्षा कंपनियों ने कूट भाषा वाले फ़ोन और ऐप में सेंध लगाकर कई हिंसक चरमपंथियों को रोका और बहुतों की जानें बचाईं.लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि इन ‘हथियारों’ के ख़रीदार अपनी मर्ज़ी से जासूसी न करने लगें. जाहिर है स्मार्ट फ़ोन का इस्तेमाल करनेवाले लोगों की हर गतिविधियाँ रिकॉर्ड हो रही हैं.

आईफ़ोन को सबसे सुरक्षित माना जाता है लेकिन स्पाईवेयर ने इसमें भी सेंध लगा ली है. अब आईफ़ोन भी बहुत सुरक्षित नहीं रहा. एक रिसर्च के ये खुलासा हुआ है कि जाने-अनजाने में आपके आई-फ़ोन से कोई लिंक क्लिक हो जाने पर आपका स्मार्ट आई-फ़ोन का नियंत्रण किसी और के पास जा सकता है और आपका  डेटा ट्रांसफ़र हो सकता है. इस खुलासे के बाद  बाद से ऐपल को अपने हर ग्राहक को नियमित रूप से अपडेट भेजना शुरू करना पड़ा था.

आप जब भी कोई गुप्त बात करें तो अपने मोबाइल को अपने से बहुत दूर रखें क्योंकि आपको पता ही नहीं चलेगा कि अब आपके स्मार्ट फ़ोन के कैमरे ने खुद काम करना शुरू कर दिया है.आप निश्चिन्त होकर अपना काम कर रहे हैं और आपसे मीलों दूर बैठा व्यक्ति आपको आपके समरत फ़ोन कैमरे के जरिये देख रहा है और सुन रहा है.

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