By, Shrikant Pratyush
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भंसाली की अब तक की सारी फिल्मों का कोलाज है करण जौहर के ‘कलंक’ का टीजर

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आपको बता दू की भंसाली की अब तक की सारी फिल्मों का कोलाज है.  करण जोहर के मूवी ‘कलंक’ में इसमें सबसे खास बातें ये हैं

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भंसाली की अब तक की सारी फिल्मों का कोलाज है करण जौहर के ‘कलंक’ का टीजर

सिटी पोस्ट लाइव- आपको बता दू की भंसाली की अब तक की सारी फिल्मों का कोलाज है.  करण जोहर के मूवी ‘कलंक’ में इसमें सबसे खास बातें ये हैं की इसका डिजिटल रिव्यू: कलंक (टीजर) इस फिल्म के कलाकार हैं. माधुरी दीक्षित, सोनाक्षी सिन्हा, आलिया भट्ट, आदित्य रॉय कपूर, संजय दत्त और वरुण धवन साथ ही इस फिल्म के निर्देशक: अभिषेक वर्मन के बैनर तले बने फॉक्सस्टार स्टूडियोज, धर्मा प्रोडक्शंस, नाडियाडवाला ग्रांडसंस है.

किसी ने तो संजय लीला भंसाली को उनके ही खेल में मात देने का बीड़ा उठाया है . संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ से लेकर ‘बाजीराव-मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ तक बड़े पर्दे पर सिनेमा का जो तिलिस्म गढ़ चुके हैं, उसकी तुलना बीते जमाने की ‘मुगले आजम’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों से की जाती है। वही अब उनकी फिल्मों से तुलना ‘कलंक’ की होने जा रही है। करण जौहर के लिए यह कसौटी आसान नहीं है. ‘कलंक’ का टीजर ‘देवदास’ जैसे फ्रेम से खुलता है. ‘खामोशी’ और ‘ब्लैक’ जैसे शॉट डिवीजन से आगे बढ़ता है. ‘बाजीराव- मस्तानी’ का रंग गुलाल बिखेरता है. ‘हम दिल दे चुके सनम’ की लम्हों की चोरियां दिखाता है और, फिर आ जाता है ‘पद्मावत’ के जानवर और इंसान के द्वंद्व पर . ऐसा हो सकता है कि अभिषेक वर्मन ने ये सारी दृश्यावली खुद से ही सजाई हो या हॉलीवुड की पीरियड फिल्मों के संदर्भ से बनाई हो . खास बात यह है कि भंसाली जैसा असर तब तक नहीं आता, जब तक आप भारत की मिट्टी की गंध नहीं पहचानते.

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इस देश में एक अलग ही खुशबू है, इसका अलग ही मिजाज है. जी हा संगीत यहां धमनियों में बहता है. सुर बनाने नहीं पड़ते, क्रोंच पक्षी का रुदन देख खुद ब खुद कंठ से फूटते हैं. भंसाली ने अपनी फिल्मों में यही सूत्र पकड़े रखा है. उनकी फिल्म का कैनवास संगीत से सांसें लेता है, वह अलग से जोड़ा नहीं लगता. ‘कलंक’ का टीजर किसी खास संगीत लहरी पर तैर नहीं रहा है. अलग-अलग दृश्यों और दमदार संवादों को मन कों जैसा पिरोने के लिए अभिषेक को मखमल के धागों जैसा संगीत लगाना था. वही फिल्म का टीजर बताता है कि फिल्म बहुत भव्य है . सिनेमा और दर्शक का रिश्ता भी बहुत नाजुक होता है, वह निभाना नहीं चुकाना पड़ता है . कीमत जो अब महंगी हो चली है.

अनामिका सिंह

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