By, Shrikant Pratyush
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पटना हाईकोर्ट में PIL, ‘उन क़ैदियों की रिहाई की मांग जो अबतक साबित नहीं हुए हैं दोषी

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कोरोना से पूरा देश संघर्ष कर रहा है. सभी सरकारें सब काम छोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण (Corona virus infection) के खतरे के बीच पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया गया है.

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पटना हाईकोर्ट में PIL, ‘उन क़ैदियों की रिहाई की मांग जो अबतक साबित नहीं हुए हैं दोषी

सिटी पोस्ट लाइव : कोरोना से पूरा देश संघर्ष कर रहा है. सभी सरकारें सब काम छोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण (Corona virus infection) के खतरे के बीच पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया गया है. बिहार में भी इस मरीज के अब तक 4 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं. वायरस के विस्तार के आसन्न ख़तरे को देखते हुए जेलों में भीड़ कम करने के लिए पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) के चीफ जस्टिस को एक पत्र  के माध्यम से लोकहित याचिका भेजी गई है. इसमें जेलों में बंद कैदियों को वायरस के खतरे से बचाने के उपाय अपनाने की बात कही गई है.

खबर के अनुसार  यह लोकहित याचिका (Public interest litigation) अधिवक्ता प्रभात रंजन द्विवेदी की ओर से चीफ जस्टिस संजय करोल (Chief Justice Sanjay Karol) के निजी सचिव को उपलब्ध करा दी गई है. इस याचिका में कहा गया है कि बिहार के जेलों को भी इस बीमारी के प्रकोप से बचाया जाना चाहिए. बिहार की जेलों में इतनी जगह नहीं है कि क़ैदियों के बीच एक मीटर की दूरी बरकरार रखी जाय. इसलिए यह ज़रूरी है कि उन क़ैदियों को पेरोल पर रिहा किया जाए, जिन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं. उन्हें भी कुछ दिनों के लिए  पेरोल पर छोड़ा जाए.

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गौरतलब है कि लॉकडाउन के चलते पटना हाईकोर्ट में अभी न्यायिक कार्य बाधित है इसलिए ये कब मेंशन होता है इसका इंतजार है. यही वजह है कि अधिवक्ता ने ये जनहित याचिका पत्र द्वारा पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी है.गौरतलब है कि कोरोना वायरस के फैलाव को देखते हुए बीते 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने देश की जेलों में कैदियों की बड़ी संख्या पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा था कि ये सुनिश्चित करना सबका कर्तव्य है कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए जेलों में स्वास्थ्य सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए जाएं.

सर्वोच्च अदालत ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को लेकर राज्यों को कुछ कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के लिए विचार करने को कहा था. अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेलों में कैदियों की भीड़ का मुद्दा हमारे संज्ञान में आया है. खास तौर पर कोरोना वायरस से महामारी के खतरे को देखते हुए ये मुद्दा और भी गंभीर है.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा, कोरोना वायरस के फैलने को जहां तक नियंत्रित रखा जा सकता है, उसके लिए सभी मुमिकन उपाय किए जाने चाहिए. इस संबंध में सभी राज्यों ने अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं जिनका एमिकस क्यूरी और सॉलिसिटर जनरल निरीक्षण कर रहे हैं. हर राज्य ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या को देखने के लिए तैयार रहने की इच्छा जताई है.

सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में कैदियोंकी भीड़ को कम करने के लिए कुछ कैदियों को पैरोल पर छोड़ने पर भी राज्यों से विचार करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने हर राज्य से हाई पावर कमेटी गठित करने के लिए कहा जो ये तय करेगी कि किस कैटेगरी के कैदियों को पैरोल पर छोड़ा जा सकता है या अंतरिम जमानत पर उपर्युक्त समय के लिए रिहा किया जा सकता है.

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