By, Shrikant Pratyush
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मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस का जारी है कहर, बच्चों की शुरू हो चुकी है मौत

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मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस का जारी है कहर, बच्चों की शुरू हो चुकी है मौत

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में तापमान अपनी चरम सिमा पर है. गर्मी से लोग बेहाल हैं. गर्मी बढ़ने के साथ ही बिहार के  मुजफ्फरपुर सहित आस-पास के जिलों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस का प्रकोप बढ़ गया है. इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे होते हैं. बच्चों की बीमारी एईएस यानि एक्यूट इन्सेफेलाइटिस के दमदार दस्तक ने लोगों की नींद उड़ा दी है. अब तक 4 बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें एक बच्चे की मौत भी हो गई है.  उमस भरी गर्मी बढ़ते ही चमकी और बुखार से पीड़ित बच्चे बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग बीमारी से बचाव के लिए अलर्ट पर होने का दावा कर रहा है. बच्चों को धूप से बचाने और खान-पान में सावधानी बरतने की सलाह स्वास्थ्य विभाग दे रहा है.

सरकारी आकंड़ों के अनुसार, मौजूदा साल में एक बच्चे की मौत इस बीमारी से हो चुकी है. शिवहर के तरियानी के बच्चे की मौत एईएस से एसकेएमसीएच में इलाज के दौरान हुई है. एसकेएमसीएच में एईएस से मिलते-जुलते लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हुई है. हलांकि, इसकी पुष्टि पटना के एमआरआई से रिपोर्ट आने के बाद होगी.इस साल मुजफ्फरपुर समेत आस-पास के जिलों से एसकेएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती होने वाले 4 बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है. तापमान में बढ़ोतरी और शरीर से पसीना निकलने वाली ऊमस भरी गर्मी शुरू होने पर एईएस के मामले बढ़ने की आशंका है.

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स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी समेत एसकेएमसीच के चिकित्सकों को बीमारी से निपटने के लिए अलर्ट कर दिया है. 24 बेड वाले आईसीयू और पीआईसीयू को एईएस के लिए एसकेएमसीएच में विशेष रूप से तैयार कर लिया गया है. इंटर्न कर रहे डॉक्‍टरों और नर्स को प्रशिक्षण देकर तैयार रखा गया है.एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ सुनील शाही ने न्यूज 18 से बातचीत में बताया कि इस साल जनवरी माह में पहला केस आ गया था. 15 मई तक कुल 5 बच्चे एईएस से मिलते-जुलते लक्षण वाले मिले, जिसमें से एक में जेई की पुष्टि हुई.

गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर में एईएस ने साल 1995 में महामारी के रूम में दस्तक दिया था. पिछले 8 सालों में ही 1134 बच्चे बीमारी के शिकार हुए, जिनमें से 344 बच्चों की मौत हो गई. कई बच्चे विकलांगता के शिकार हो गए.वर्ष 2010, 2012 और 2015 में बच्चों की मौत का सिलसिला बढ़ता चला गया. साल 2010 से पहले सरकारी आकंड़े तैयार नहीं किए जाते थे, लेकिन उसके बाद से हरेक साल बच्चों की मौत का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग में दर्ज होता रहा है. मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और वैशाली जिले से सबसे अधिक मामले एईएस के आते रहे हैं. एक्यूट इन्सेफेलाइटिस के कहर से ईलाके में दहशत व्याप्त है.

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