By, Shrikant Pratyush
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पाकुड़ : इंद्रदेव की बेरूखी से धान की फसल सूखकर हो गई बर्बाद

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देर से ही सही बारिश होने पर किसानों ने युद्ध स्तर पर इस उम्मीद में धान रोपनी की थी कि अब अगर ठीक-ठाक बारिश हुई तो उन्हें अच्छी पैदावार मिल जाएगी । लेकिन इंद्रदेव की बेरूखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया ।

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पाकुड़ : इंद्रदेव की बेरूखी से धान की फसल सूखकर हो गई बर्बाद

सिटी पोस्ट लाइव : देर से ही सही बारिश होने पर किसानों ने युद्ध स्तर पर इस उम्मीद में धान रोपनी की थी कि अब अगर ठीक-ठाक बारिश हुई तो उन्हें अच्छी पैदावार मिल जाएगी। लेकिन इंद्रदेव की बेरूखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। फलस्वरूप पानी के अभाव में धान की फसल सूखकर बर्बाद हो गई। उल्लेखनीय है कि धान की फसल में बाली निकलने के वक्त पानी की सख्त जरूरत होती है । ऐसी स्थिति में पानी नहीं मिलने से मुरझाती फसल को देख किसानों का कलेजा फट रहा है। निचले इलाके में तो एक सप्ताह के अंदर थोड़ी बहुत भी बारिश हो जाए तो फसल अच्छी होने की उम्मीद अब भी है । लेकिन इसकी संभावना नहीं के बराबर दिखाई दे रही है। लेकिन ऊंचे इलाके की धान की फसल तो बिल्कुल ही सूख कर बर्बाद हो गई है । किसान उसे काट कर बतौर चारा उपयोग करने लगे हैं। किसान मंगल साह ने बताया कि मैंने दस बीघे में धान लगाया था । पानी के अभाव में सब सूख गया। मेरी तो पूँजी ही डूब गई। सूख चुके पौधों को काट कर पशुओं को खिला रहा हूँ। उन्होंने बताया कि धान में बाली तो आई लेकिन पानी के अभाव में उसमें दाना ही नहीं आया। कुछ यही हाल पाकुड़िया, महेशपुर व अमड़ापाड़ा प्रखंड के लगभग सभी किसानों की है। किसानों ने बताया कि धान के फसल की बर्बादी के चलते आने वाले दिनों में इस इलाके में चारे का संकट भी खड़ा हो जाएगा। अधिकांश किसान तो सूख चुकी धान की फसल तक को काटने की स्थिति में नहीं हैं । उधर जिला कृषि पदाधिकारी एडमंड मिंज ने जिले में सूख कर बर्बाद हो गई धान की फसल के बावत गहरा अफसोस जताया । साथ ही कहा कि किसान इसकी भरपाई सरसों व अन्य दलहन तथा तिलहन की खेती से कर सकते हैं।

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