By, Shrikant Pratyush
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बगोदर या बड़कागांव से विधायक बनने की संभावनाएं ढूंढ रहे प्रदीप

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कांग्रेस को छोड़कर प्रदेश की लगभग सभी पार्टियां राज्य में चुनाव की तैयारी में जुट गयी हैं। चुनाव की आहट से टिकट की लालसा में दलबदल भी तेजी से हो रहा है।

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बगोदर या बड़कागांव से विधायक बनने की संभावनाएं ढूंढ रहे प्रदीप

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: कांग्रेस को छोड़कर प्रदेश की लगभग सभी पार्टियां राज्य में चुनाव की तैयारी में जुट गयी हैं। चुनाव की आहट से टिकट की लालसा में दलबदल भी तेजी से हो रहा है। कमजोर पार्टियों को छोड़ विधायक बनने की चाह रखने वाले नेता लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में कांंग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल प्रदीप प्रसाद के बगोदर या बड़कागांव से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गयी हैं। वैसे, प्रदीप प्रसाद अबतक हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र के लिए ही तैयारी करते रहे हैं लेकिन वे मूल तौर पर बगोदर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं और माना जा रहा है कि भाजपा से टिकट मिलने पर वे वहां से भी प्रभावी हो सकते हैं। संभावना भी यही है कि भाजपा उन्हें बगोदर से चुनाव लड़ा सकती है। लेकिन कुछ लोग प्रदीप प्रसाद के हजारीबाग जिले के बड़कागांव से ही चुनाव लड़ने की चर्चा कर रहे हैं। बगोदर की सीट भी अभी भाजपा के पास है। नागेंद्र महतो ने 2014 के चुनाव में भाकपा माले के विनोद सिंह को हराया था। विनोद सिंह ने कभी बगोदर का मैदान नहीं छोड़ा। प्रदीप के विनोद सिंह से व्यक्तिगत संबंध भी बेहतर बताए जाते हैं। वहीं बड़कागांव में कांग्रेस की निर्मला देवी विधायक हैंं। प्रदीप 2014 के विधानसभा चुनाव में हजारीबाग से निर्दलीय चुनाव लड़े थे और लगभग 60 हजार वोट लाकर उन्होंने भाजपा के मनीष जायसवाल को सीधी चुनौती दी थी। कांग्रेस से पहले प्रदीप आजसू में थे। आजसू में रहकर उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लामबंद किया लेकिन 2014 के चुनाव में आजसू ने भाजपा से गठबंधन कर आठ सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें हजारीबाग की सीट शामिल नहीं थी। ऐसे में प्रदीप प्रसाद निर्दलीय चुनाव लड़ गए। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद वे फिर आजसू की राजनीति में शामिल हुए लेकिन उन्हें इसका अहसास हो गया कि आजसू में रहकर हजारीबाग की सीट नहीं लड़ी जा सकती। तब वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने गर्मजोशी से प्रदीप का स्वागत किया। कांग्रेस में शामिल होते ही प्रदीप ने अपनी ताकत भी दिखाई। लेकिन लोकसभा चुनाव में प्रदीप ने कांग्रेस की दयनीय हालत देखकर महसूस किया कि यह ठिकाना भी मुफीद नहीं है। प्रदीप कांग्रेस से लोकसभा चुनाव भी लड़ने को तैयार थे लेकिन पार्टी ने गोपाल साहूू को वहां उतार दिया। लोकसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार के बाद प्रदीप ने विधायक बनने की लालसा के चलते भाजपा से नजदीकी बढ़ायी तो भाजपा ने हजारीबाग से कांग्रेस के लिए मजबूत माने जाने वाले प्रदीप प्रसाद को अपनी ओर खींच लिया है।

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