BPSC अभ्यर्थियों ने दिखाया रौद्र रूप, तो ऊपर तक हिली सरकार, आ सकती है गुड न्यूज़

बैकफ़ुट पर सरकार, हो सकता है रीएग्ज़ाम

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट न्यूज़

पटना: आज न प्रशांत किशोर थे और न पप्पू यादव, राजनीति का कोई चेहरा नहीं था। बस हज़ारों छात्र-छात्राओं का सैलाब था। इन्हें न लाठी से डर लग रहा था, न गोली से। वाटर कैनन से निकलने वाली पानी की बौछारों का डर भी इन्हें पीछे हटाने में सक्षम नहीं था। शुरू में पुलिस को लगा कि बच्चे हैं। लाठी, धमकी और थप्पड़ों से शायद बात बन जाए, पर पुलिस ने जितनी कोशिश की, छात्र-छात्राओं का आक्रोश उतना ही बढ़ता गया। पुलिस की बेरिकेडिंग्स तितर-बितर हो गई। लाठियां धरी की धरी रह गई।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

स्टूडेंट्स का जनसैलाब गर्दनीबाग से उमड़ता हुआ बिहार लोक सेवा आयोग के दफ्तर तक आ पहुंचा। स्टूडेंट्स ने दफ़्तर घेर लिया। छात्राएं सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर लेकर बीच सड़क पर लेट गई। डीएसपी तक से भिड़ गई। क्यों आ गई ऐसी नौबत। आज जो हुआ, वह बताता है कि इन बच्चों का सिस्टम पर से भरोसा डगमगा गया है।

आज इन बच्चों ने जिस तरह से रौद्र रूप दिखाया है, उससे बिहार लोक सेवा आयोग और बिहार सरकार ऊपर तक हिल गई है। सरकार बैकफ़ुट पर है, क्योंकि अब सरकार यह भी नहीं कह पा रही कि यह नेताओं का आंदोलन है, छात्र इसमें शामिल नहीं हैं। आज के उग्र आंदोलन के बाद सूत्रों की मानें, तो आयोग और सरकार भी यह सोचने पर विवश हो गई है कि क्या री-एग्ज़ाम की मांग मान ली जाए।

BPSC 70वीं पीटी परीक्षा का रिज़ल्ट जारी हो जाने के बाद यह माना जा रहा था कि आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आंदोलन और तेज़ हो गया है और इससे सरकार की चिंता बढ़ गई है। हो सकता है कि अब सरकार की तरफ़ से कोई बड़ा फ़ैसला ले लिया जाए और BPSC की 70वीं पीटी परीक्षा को फिर से कराने की उनकी मांग मान ली जाए। कल पटना हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई होनी है। छात्र-छात्राओं की नज़र उच्च न्यायालय के फ़ैसले पर टिकी है।

Share This Article