बजट का बेसब्री से इंतजार, सत्र से पहले सियासी उठापटक तेज.

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव : संसद का बजट सत्र आज से शुरू होने जा रहा है. मोदी की अगुआई वाली NDA सरकार तीसरे टर्म का दूसरा बजट पेश करेगी. सियासत के लिए भी यह सत्र बहुत अहम होगा क्योंकि यहां इस बार नए राजनीतिक समीकरणों को बनते-बिगड़ते भी देखा जा सकता है. पिछले साल जून में आम चुनाव के बाद जब लोकसभा में BJP का आंकड़ा बहुमत से नीचे आया, तो कहा गया कि मोदी सरकार के लिए अगले पांच साल कठिन हो सकते हैं. लेकिन फिर पहले हरियाणा और बाद में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद NDA ने मजबूत वापसी कर ली. विपक्ष फिर बैकफुट पर चला गया.

 यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना हो, या शरद पवार की अगुआई वाली NCP, इन दलों में उठापठक की खबरें आ रही हैं.सत्र में यह देखना दिलचस्प होगा कि इनके सांसद कितने एकजुट रह पाते हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम का भी व्यापक असर सत्र के दौरान दिखेगा. नवीन पटनायक की अगुआई वाले BJD और जगन रेड्डी की अगुआई वाली YSR कांग्रेस भी पिछले साल चुनाव में मिली कड़ी पराजय के बाद अपने दल को एकजुट रखने में संघर्ष कर रहे हैं. यह सत्र उनके लिए भी अहम होगा कि उनके दल के सांसद कितने एकजुट रह पाते हैं.

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हाल के दिनों में दोनों दलों के कुछ राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं. कुछ और सांसद सत्र के दौरान पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं.इनके सत्तारूढ़ दल से ही जुड़ने की खबर है. ऐसे में राज्यसभा का पूरा समीकरण बदल जाएगा. BJP वहां भी पूरी तरह मजबूत हो जाएगी. वक्फ बिल संसद में पेश और पास होगा. NDA सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि किसी भी सूरत में इस सत्र में वह इस बिल को पास करवा कर रहेगी.उसका दावा है कि इसके लिए दोनों सदनों में उसके पास पर्याप्त नंबर हैं. पिछले साल जब यह बिल पेश हुआ था, तब सरकार की सहयोगी TDP ने भी इसके कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई थी. वहीं दूसरे सहयोगी JDU के कुछ नेताओं में भी इस बिल को लेकर सवाल थे. लेकिन अब दोनों दल इस बिल पर सरकार के साथ दिख रहे हैं. ऐसी स्थिति में विपक्ष के लिए इस बिल पर अपना स्टैंड सामने रखना बहुत चुनौतीपूर्ण होगा. जब महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बाद I.N.D.I.A. बिखरा-बिखरा सा दिखने लगा है और अधिकतर क्षेत्रीय दल हाल के दिनों में ‘एकला चलो रे’ की रणनीति पर बढ़ते दिख रहे हैं.

हाल के वर्षों में शायद ही किसी बजट पर आम लोगों से लेकर देश के उद्योग जगत तक की इस कदर उम्मीद भरी निगाहें टिकी हों. सबको राहत चाहिए. हाल के सालों में मिडल क्लास उपेक्षित महसूस कर रहा है. बजट से पहले ही इस वर्ग ने सरकार पर दबाव बना लिया है और माना जा रहा है कि BJP अपने सबसे मजबूत और कोर समर्थक वर्ग को इग्नोर करने का जोखिम नहीं लेगी. ऐसे में मिडल क्लास के लिए इस बजट में बड़ा पैकेज सामने आ सकता है. अगर ऐसा हुआ तो BJP और केंद्र सरकार इस वर्ग के बीच अपनी उपस्थिति और मजबूत करेगी. यह वर्ग नैरेटिव बनाने में भी अहम योगदान निभाता है.

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