व्हीलचेयर क्रिकेट और आर्म रेसलिंग के बाद, एमबीए ज्ञान प्रकाश शर्मा को बैडमिंटन से क्यों है खास लगाव

केआईपीजी 2025 स्पॉटलाइट: किसान के बेटे शर्मा खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में बिहार का कर रहे हैं प्रतिनिधित्व

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By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव

नई दिल्ली। चुनौतियों का सामना करना ज्ञान प्रकाश शर्मा की आदत है। उन्होंने अपने कौशल के दम पर उत्तर प्रदेश के लिए व्हीलचेयर क्रिकेट खेला और आर्म रेसलिंग में भी हाथ आजमाया। इतना ही नहीं, नेशनल ओपन चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीत लिया। हालांकि, बिहार के पटना निवासी और दोनों पैरों से दिव्यांग ज्ञान के दिल के सबसे करीब बैडमिंटन है। यही वजह है कि पहली बार खेलो इंडिया पैरा गेम्स में हिस्सा लेने पहुंचे ज्ञान इस खेल में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

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डब्ल्यूसी एच1 कैटेगरी में खेलने वाले ज्ञान के पास एचआर में एमबीए की डिग्री भी है, जिसे उन्होंने इसी साल डॉक्टर शकुंतला मिश्रा नेशनल रिहैब यूनिवर्सिटी (लखनऊ) से पूरा किया। इसी विश्वविद्यालय के कैंपस में वे नियमित रूप से बैडमिंटन की प्रैक्टिस भी करते हैं। खास बात यह है कि वे खेलो इंडिया पैरा गेम्स के इस संस्करण में बिहार से भाग लेने वाले एकमात्र व्हीलचेयर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।

बैडमिंटन से जुड़ाव कैसे हुआ?

इस बारे में ज्ञान बताते हैं, “लखनऊ में 2023 में पैरा नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप हुई थी। मैं उस समय मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था और हॉस्पिटैलिटी टीम का हिस्सा था। वहां मैंने खिलाड़ियों, रेफरियों और अधिकारियों से मुलाकात की, जिससे इस खेल के प्रति मेरी रुचि बढ़ी। तभी से मैंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया।”

अपने सफर के बारे में बताते हुए ज्ञान कहते हैं, “2024 में मैंने बिहार के लिए अपनी कैटेगरी में चैंपियनशिप जीती, फिर झारखंड के जमशेदपुर में सीनियर नेशनल पैरा चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। यह मेरा पहला बड़ा टूर्नामेंट था, जिसमें 64 खिलाड़ियों के बीच मैंने प्री-क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर मेरा चयन खेलो इंडिया पैरा गेम्स के लिए हुआ।”

उत्तर प्रदेश में एक दोस्त से उधार ली गई व्हीलचेयर के सहारे दिल्ली पहुंचे ज्ञान व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के नियमित खिलाड़ी भी हैं। इसके अलावा, उन्होंने इंदौर में हुई ऑल इंडिया ओपन आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में 57 किलोग्राम कैटेगरी में कांस्य पदक जीता था।

ज्ञान बताते हैं, “आर्म रेसलिंग में उतरना मेरे लिए एक संयोग था। मेरे दोस्त रिंकू ने मजाक में मुझसे मुकाबला करने को कहा, जिसमें मैं जीत गया। फिर उसने मुझे चैंपियनशिप में भाग लेने की सलाह दी, और बिना किसी खास तैयारी के मैंने इसमें हिस्सा लिया और कांस्य पदक जीत लिया।”

बैडमिंटन में आगे बढ़ने का सपना

ज्ञान का प्राथमिक लक्ष्य एक अच्छी नौकरी पाना है, लेकिन बैडमिंटन के लिए उनका जुनून कम नहीं हुआ है। वे कहते हैं, “परिवार की जिम्मेदारियों के कारण मैं नियमित अभ्यास नहीं कर पाता, लेकिन मैं असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी की तैयारी कर रहा हूं। बावजूद इसके, बैडमिंटन मेरे दिल के बेहद करीब है और इसमें एक पहचान बनाना चाहता हूं। खेलो इंडिया पैरा गेम्स मेरी इस यात्रा का अहम पड़ाव है।”

खेलो इंडिया पैरा गेम्स को लेकर उत्साह

ज्ञान का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से नए खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में भारत सरकार ने बेहतरीन इंतजाम किए हैं। पूरा स्टेडियम दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। यहां रहने, खाने और अन्य सुविधाओं का शानदार प्रबंधन है, और सभी वालंटियर्स और आयोजकों का व्यवहार भी सराहनीय है। ऐसे टूर्नामेंट नियमित रूप से होने चाहिए ताकि उभरते खिलाड़ी अपने सपनों को साकार कर सकें।”

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