केआईपीजी 2025: इंटरनेट कैफे से पैरा टेबल टेनिस तक – प्रेरणादायक है दीपक सरगर की कहानी

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव

नई दिल्ली। संघर्ष, संकल्प और साहस की मिसाल बने महाराष्ट्र के सांगली जिले के दीपक सरगर ने यह साबित कर दिया कि सीमित शारीरिक क्षमताएं भी असीमित सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकतीं। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद, 26 वर्षीय दीपक न केवल सोशल वर्क में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके हैं, बल्कि अपने बड़े भाई के साथ मिलकर एक इंटरनेट कैफे भी चलाते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने पैरा टेबल टेनिस में अपनी अलग पहचान बनाई है और आज खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में भाग ले रहे हैं।

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मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से जूझ रहे हैं दीपक

दीपक को 6 साल की उम्र से प्रोग्रेसिव मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण महसूस होने लगे थे, जिससे धीरे-धीरे उनकी मांसपेशियाँ कमजोर होती गईं। 10वीं कक्षा तक आते-आते वे ठीक से चल भी नहीं पाते थे और 20 साल की उम्र तक व्हीलचेयर पर आ गए। उनके बड़े भाई को भी यही बीमारी थी, इसलिए उन्होंने इससे निपटने के तरीके अपने भाई से सीखे।

पिता के निधन के बाद, उनकी माँ ने सांगली में एक फूलों की दुकान शुरू की, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग देने के लिए दीपक ने सोशल वर्क में मास्टर डिग्री हासिल की और अपने भाई के साथ मिलकर गांव में एक इंटरनेट कैफे शुरू किया। यह न केवल उनकी आजीविका का साधन बना, बल्कि तकनीक और शिक्षा के प्रति उनकी रुचि को भी बढ़ावा दिया।

खेल ने दी नई पहचान

बीमारी से जूझते हुए, दीपक के एक दोस्त ने उन्हें योग करने की सलाह दी, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिली। लेकिन असली बदलाव तब आया जब उन्होंने टेबल टेनिस खेलना शुरू किया। खेल ने न केवल उन्हें नई ऊर्जा दी, बल्कि यह उनके लिए संघर्ष को ताकत में बदलने का जरिया बन गया। दीपक ने रैंकिंग और राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया। पिछले साल नवंबर में इंदौर और इस साल मार्च में वडोदरा में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने उन्हें खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 तक पहुँचाया। वर्तमान में वे गौतम कुलकर्णी और हरीश पुजारी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

मुझे पता है कि यह बीमारी धीरे-धीरे मेरे शरीर को प्रभावित करेगी, लेकिन मैं तब तक हर पल जीना चाहता हूँ। मेरे हाथ भी कमजोर होने लगे हैं, लेकिन मैं हार मानने वालों में से नहीं हूँ। खेल, शिक्षा और तकनीक के सहारे मैं अपनी ज़िंदगी को आगे बढ़ा रहा हूँ।

दीपक सरगर, टेबल टेनिस

खेलो इंडिया पैरा गेम्स में शामिल होना दीपक के लिए सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का मौका है। इंटरनेट कैफे, सोशल वर्क की पढ़ाई और पैरा टेबल टेनिस – इन तीनों पहलुओं को संतुलित करते हुए उन्होंने यह दिखाया कि असली जीत मुश्किलों से लड़ने में है। दीपक सरगर की यह यात्रा ना सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि जज़्बा और मेहनत से हर बाधा को पार किया जा सकता है।

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