प्रेम कुमार ने RJD को जबरदस्त लपेटागिनाए इतने घोटाले कि सुनकर चौंक जाएंगे!

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
पटना :
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी तापमान बढ़ने लगा है। एक ओर जहां महागठबंधन बैठकों और रणनीतियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर एनडीए के नेता जनता के बीच सक्रिय रूप से पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में आज बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने सीवान दौरे के दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत की और महागठबंधन पर जमकर निशाना साधा। महागठबंधन की हालिया बैठक और तेजस्वी यादव को समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर कटाक्ष करते हुए प्रेम कुमार ने कहा कोई भी बैठक कर सकता है, यह उनका अधिकार है। नेता कौन होगा, यह तय करना उनका आंतरिक मामला है। लेकिन अंतिम फैसला तो बिहार की जनता के हाथ में है।” मंत्री प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में एनडीए शासन की तुलना राजद-कांग्रेस शासनकाल से करते हुए कहा:“बीस साल पहले बिहार अंधेरे में था, गड्ढों में था, जंगलराज था। ये राज्य घोटालों का अड्डा बन चुका था – अलकतरा घोटाला, चारा घोटाला, दवा घोटाला जैसी घटनाओं ने बिहार की छवि को धूमिल कर दिया था।” उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार के आने के बाद बिहार ने विकास की राह पकड़ ली है। “आज गांव हो या शहर, हर जगह बिजली, सड़क, पानी और कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। सुशासन की जो परिभाषा है, वो हमने जमीन पर उतारी है।”
डॉ. प्रेम कुमार ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भरोसा जताया कि जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए गठबंधन के साथ एक बार फिर खड़ी होगी। “हमारे कार्य, हमारी नीतियां और हमारा सेवा भाव ही हमारी पूंजी है। जनता ने देखा है कि हमने केवल वादे नहीं किए, उन्हें निभाया भी है।”बिहार में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नज़दीक आती जा रही है, नेताओं की ज़मीनी सक्रियता और सियासी बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है। महागठबंधन जहां नेतृत्व को लेकर भीतर ही भीतर खींचतान में दिख रहा है, वहीं एनडीए अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाकर जनता को साधने की कोशिश में जुटा है। डॉ. प्रेम कुमार का यह बयान जहां एक ओर विपक्ष पर हमला है, वहीं दूसरी ओर यह एनडीए के “विकास बनाम भ्रष्टाचार” नैरेटिव को दोहराने की रणनीति भी मानी जा रही है।
बिहार की सियासी बिसात अब पूरी तरह बिछ चुकी है। आगामी दिनों में सभी प्रमुख दलों के नेता ज़मीन पर उतरेंगे, रैलियां होंगी, वादे होंगे और आरोप-प्रत्यारोप भी चरम पर होंगे। अब देखना ये होगा कि जनता वादों पर भरोसा जताती है, या कामों पर।

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