सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में एक निर्दोष व्यक्ति को दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई 20 साल की सजा को हाईकोर्ट ने ख़त्म कर दिया है.तीन साल जेल में बिता चुके आरोपित बहेड़ा थानाक्षेत्र निवासी मुकेश कुमार को दोषमुक्त करार दे दिया है.अब डीजीपी के आदेश पर उस थानेदार और अनुसंधानक को सस्पेंड कर दिया गया है जिसने निर्दोष को झूठे मामले में फंसा दिया था. इस मामले में एसडीपीओ को भी नोटिस दिया गया है.
पूरे मामले को लेकर डीजीपी विनय कुमार काफी गंभीर थे. हाईकोर्ट से मुकेश के दोषमुक्त होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने पूरे मामले पर संज्ञान लिया और जांच शुरू हुई. सीआईजी के उप पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी पूरी टीम के साथ पीड़ित से पूरी जानकारी प्राप्त की.एक निर्दोष को अनुसंधान और पर्यवेक्षण में कैसे दोषी बना दिया गया, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, दोषी बनाने के पीछे क्या कारण था आदि सवालों का उत्तर टीम ने प्राप्त किया. पुलिसवाले दोषी पाए गए.डीजीपी के आदेश पर अनुसंधानक और तत्कालीन थानाध्यक्ष पर दरभंगा एसएसपी को कार्रवाई करने का आदेश दिया गया.
57 मिनट के उस ऑडियो क्लिप को सुरक्षित किया, जिसमें पीड़ित के पिता से पंचायती के दौरान छह लाख रुपये की मांग की जा रही थी. जिसे नहीं देने के कारण निर्दोष को आरोपित बना दिया गया.सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्रनाथ सिंह उर्फ चिंटू पीड़ित की लिए लड़ाई लड़ने का काम किया है. बहेड़ा थानाक्षेत्र के एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म मामले में मुकेश कुमार की गिरफ्तारी आठ अगस्त 2020 को हुई थी.दरभंगा पॉक्सो कोर्ट ने 29 नवंबर 2023 को आरोपित को दोषी पाते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट के खंडपीठ ने 28 नवंबर 2024 को आरोपित को दोषमुक्त कर दिया.