सिटी पोस्ट लाइव : वक्फ बिल संशोधन बिल लोक सभा और राज्य सभा से पास हो चूका है.इस बिल का समर्थन किये जाने के बाद से जेडीयू में घमाशान जारी है.बगावत शुरू हो गई है.बिल को समर्थन देने से नाराज 4 मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है.इनमें अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, प्रदेश महासचिव सिए मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन , और खुद को मोतिहारी के ढाका विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी बताने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं.
जेडीयू छोड़नेवाले ईन नेताओं का आरोप है कि पार्टी ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ा है. हालांकि, पार्टी ने उनके दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है.मोहम्मद कासिम अंसारी ने सीएम को लिखे पत्र में कहा, ‘वक्फ बिल पर समर्थन देकर जेडीयू ने अपनी सेक्युलर छवि वाला भरोसा तोड़ा है. लाखों मुसलमानों का यकीन टूटा है. साथ ही लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के दिए भाषण से भी लोग आहत हुए हैं. मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने कहा, ‘जेडीयू के समर्थन से लाखों-करोड़ों मुस्लिमों को धक्का लगा है. ललन सिंह के बयान काफी दुख हुआ है. मैं कई साल तक इस पार्टी में रहा. लेकिन अब इस्तीफा दे रहा हूं.’
सीएम नीतीश कुमार के करीबी जेडीयू MLC गुलाम गौस भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘बीजेपी की सरकार हमेशा मुस्लिमों के खिलाफ ही काम करती है. इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की जमीन को छिनने की कोशिश की जा रही है. वक्फ के पास जो जमीन है, उससे मुसलमानों की भलाई के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं.’अब कम्युनल और सेक्युलर में कोई फर्क नहीं रह गया है. इदारे शरिया देश के सभी हाई कोर्ट में लीगल सेल की बैठक करेगी. इस पर जल्द फैसला लेगी. दीवार पर लिखने से नहीं दिमाग से काम लेना होगा.
जेडीयू की ओर से इन इस्तीफों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि मोहम्मद कासिम अंसारी और नवाज मलिक पार्टी के किसी भी आधिकारिक पद पर नहीं हैं. पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन दोनों नेताओं का जेडीयू के संगठनात्मक ढांचे से कोई लेना-देना नहीं है.जेडीयू की टिकट पर उन्होंने कभी चुनाव लड़ा ही नहीं. डॉ. कासिम अंसारी ने राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए पहले AIMIM का दामन थामा था, लेकिन जब वहां से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ा. कासिम की जमानत जब्त हो गई थी.