तेजस्वी यादव को लेकर राहुल गांधी का बड़ा संदेश, माई-बहिन योजना को लेकर जताई नाराजगी.

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 ‘अभी नहीं बोलेंगे, बात बराबरी में करनी है’; क्या राहुल की यात्रा के बीच RJD को भी मिल गया साफ संदेश?

सिटी पोस्ट लाइव : पलायन रोको-नौकरी दो पदयात्रा पर मध्य मार्च से निकले कन्हैया कुमार का उत्साह बढाने के लिए  राहुल गांधी सोमवार को बेगूसराय पहुंचे. बेगूसराय कन्हैया का गृह जिला है तो कांग्रेस का पुराना गढ़ भी रहा है.संभवत: इसी कारण राहुल ने सहभागिता के लिए बेगूसराय का चयन किया. बहरहाल कांग्रेस-जनों के बीच ये  संदेश तो चला ही गया है.सवर्णों में भूमिहार वर्ग से आने वाले कन्हैया को कांग्रेस बिहार में अपना युवा चेहरा बना रही. कन्हैया बेरोजगारी के साथ पलायन के मुद्दे पर जनमत जुटाने का प्रयास कर रहे हैं..

संविधान और वक्फ की दुहाई दे रही कांग्रेस को आशा है कि अनुसूचित जाति और मुसलमानों से सीधे जुड़ाव वाले इन दो प्रसंगों के साथ बेरोजगारी के मुद्दे को हवा देकर वह बिहार में अपना पैर जमा पायेगी.इन तीन ज्वलंत मुद्दों से वह अपने पुराने जनाधार सवर्ण, अनुसूचित जाति, मुसलमान के साथ उस युवा-वर्ग को साध लेगी, जिसकी संख्या चुनाव में निर्णायक हैसियत वाली हो चुकी है.बेरोजगारी को लक्ष्य कर निकली इस यात्रा के अधिसंख्य पथिक युवा हैं. कन्हैया को इसका कोई मलाल भी नहीं कि बेगूसराय ने 2019 में उन्हें नकार दिया था और महागठबंधन की खींचतान के कारण उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली का रुख करना पड़ा था.पराजय वहां भी मिली, लेकिन संघर्ष का हौसला नहीं टूटा. अपने साथ-सहयोग से राहुल उस उत्साह को और बढ़ा देते हैं. यात्रियों की पिछली पांत से खींच कन्हैया को वे अपने साथ कर लेते हैं.

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बिहार में कांग्रेस आज जिस संकट का सामना कर रही, वह अतीत की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है. लोकसभा के पिछले चुनाव में उसका प्रदर्शन 2019 की तुलना में निस्संदेह अच्छा रहा था, लेकिन सीटों को लेकर मची खींचतान के कारण उसे अपने परंपरागत और संभावना वाले क्षेत्र का मोह छोड़ना पड़ा था.इस बार उसकी पुनरावृत्ति न हो, इसलिए राहुल बिहार पर फोकस किए हुए हैं. लोकसभा चुनाव के बाद वे तीसरी बार बिहार आए हैं.चुनाव से पहले वे भारत जोड़ो न्याय यात्रा के क्रम में दो बार बिहार आए थे.

अब आगे विधानसभा चुनाव है, जिसके लिए रणनीतिक पृष्ठभूमि तैयार करने के उद्देश्य से पलायन रोको-नौकरी दो यात्रा निकली गई है.जनाधार की जीवंतता से रणनीति सटीक होगी. संविधान, आरक्षण और वक्फ के मुद्दे की पैमाइश भी इसी चुनाव में होनी है.संयोग से महागठबंधन के नेतृत्वकर्ता राजद भी इन मुद्दों पर मुखर है. ऐसे में राहुल इस आंदोलन में कन्हैया को अकेले नहीं छोड़ सकते थे, क्योंकि उनके प्रति राजद की बेरुखी सर्वविदित है.राहुल सुभाष चौक से कपस्या तक दो किलोमीटर पैदल चले हैं. जोश ऐसा कि सामान्य गति वालों को साथ निभाने में दौड़ लगानी पड़ी.

बेगूसराय में सार्वजनिक तौर पर राहुल एक शब्द नहीं बोले. न संबोधन-उद्बोधन और न ही संवाद-प्रतिवाद.वे गाड़ी से उतर पदयात्रियों के बीच लपकते हुए आए और सीधे आगे बढ़ते गए. रस्सियों की घेराबंदी के बाहर से भीड़ उचककर एक नजर देख लेना चाह रही थी.लेकिन पटना एअरपोर्ट पर राहुल गांधी ने कांग्रेसियों के सामने जो कुछ तेजस्वी यादव के बारे में कहा वो तेजस्वी यादव के साथ साथ उन कांग्रेसियों की चिंता बढानेवाली है जो आरजेडी के साथ चुनाव लड़ने के पक्षधर हैं.तेजस्वी यादव के “माई-बहिन “ योजना पर राहुल ने नाराजगी जताई.कहा-इतनी बड़ी घोषणा तो कांग्रेस से विचार विमर्श के बाद ही करनी चाहिए.

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