बिहार में भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध निगरानी विभाग की विशेष कार्यवाही 105 दिन में 34 घुसखोर गिरफ्तार

Deepak Sharma

घूसखोर अधिकारीयों की टेंशन बढ़ी, निगरानी ब्यूरो की सर्जिकल स्ट्राइक जारी!

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब ज़मीन पर नतीजे दे रही है। राज्य निगरानी ब्यूरो ने इस वर्ष के पहले पांच महीनों में ही भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ तेज़ और निरंतर कार्रवाई की है। जनवरी से लेकर मई तक यानी करीब 150 दिनों में कुल 34 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की गई है। इसका अर्थ है कि हर 4 से 5 दिन में एक भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी रंगे हाथों पकड़ा जा रहा है।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

इनमें से 27 मामलों में ट्रैप ऑपरेशन के ज़रिए रिश्वत लेते हुए दोषी पकड़े गए, जिनसे कुल 12 लाख 46 हज़ार रुपये की अवैध राशि बरामद की गई। इसके अलावा, 4 अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) केस और 3 के खिलाफ पद के दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई हुई है। पकड़े गए सभी आरोपियों को निगरानी अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

निगरानी ब्यूरो की सक्रियता पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष काफी तेज़ हो गई है। उदाहरण के तौर पर, 2020 में 37, 2021 में 58, 2022 में 72 और 2023 में 36 भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, जबकि 2024 के केवल पहले 5 महीनों में ही 34 भ्रष्ट लोकसेवकों पर शिकंजा कस चुका है। यदि यह गति बनी रहती है, तो 2024 में भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई का आंकड़ा अब तक का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड बना सकता है।

2024 में अब तक 27 ट्रैप केस दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 2020 में पूरे साल में ऐसे सिर्फ 22 मामले सामने आए थे। इस वर्ष ट्रैप ऑपरेशन में पुलिस विभाग के दारोगा, राजस्व कर्मियों और कार्यपालक अभियंताओं जैसी विविध श्रेणियों के अधिकारी शामिल हैं। कार्रवाई की इस रफ्तार को बढ़ाने में निगरानी ब्यूरो की नई व्यवस्था का भी बड़ा योगदान है। अब आम जनता हेल्पलाइन नंबर या ऑफिस परिसर में लगी शिकायत पेटी के माध्यम से सीधे भ्रष्टाचार की शिकायत कर सकती है। इन शिकायतों की समीक्षा कर पीड़ित को बुलाया जाता है और त्वरित तफ्तीश कर कार्रवाई होती है।

सरकार ऐसे अधिकारियों पर भी पैनी नजर रख रही है, जिन्होंने नौकरी की आड़ में अकूत संपत्ति जुटाई है। ऐसे मामलों में DA (Disproportionate Assets) केस दर्ज कर उनकी संपत्ति की जांच और जब्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीरो टॉलरेंस नीति अब सिर्फ नारा नहीं रही, बल्कि इसका असर ज़मीनी स्तर पर दिख रहा है। निगरानी ब्यूरो की सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि अगर शिकायतें सही और सशक्त हों, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई संभव और प्रभावी है।

Share This Article