सिटी पोस्ट लाइव : आमतौर पर थानेदार के बारे में यहीं आम धारणा है कि वह खाकी वर्दी में एक लाइसेंसी गुंडा होता है.थानेदार मतलब” देना पड़ेगा रोकर या गाकर”.लेकिन मुजफ्फरपुर के थानेदार ने तो अपना ऐसा इमेज बनाया कि लोग उसके तबादले के बाद रो पड़े. लोगों ने एक थार गाड़ी को रंग-बिरंगे कपड़े, माला, झालरें फूलों से सजाया. बैंड-बाजा पार्टी बुलाया और फिर थानेदार रवि प्रकाश को पारंपरिक दूल्हे वाली टोपी ,गले में फूल-मालाएं पहनाकर उन्हें सजी हुई थार में बिठाया.
जैसे ही रवि प्रकाश गाड़ी में बैठे, कई ग्रामीण और थाना क्षेत्र के लोग उन्हें पकड़कर रोने लगे. किसी ने कहा, “सर, आप रहे तो अपराधी डरते थे, हम निश्चिंत रहते थे.” कुछ बुजुर्ग महिलाएं और पुरुषों ने उनका हाथ पकड़कर कहा, आपके सख्त तेवर से अपराधी सहमे रहते थे,अब क्या होगा ? पुलिस थाने के कर्मचारी भी गले लगकर विदाई दे रहे थे. किसी ने कहा “सर, आप जैसे अफसर बहुत कम आते हैं.
थानेदार रवि प्रकाश को लेकर लोगों में इतनी भावनाएं इसलिए उमड़ीं क्योंकि वे आम जनता से जुड़कर काम करते थे. हाल ही में कुढ़नी में हुए नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उन्होंने त्वरित कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. क्षेत्रवासियों ने उनकी कार्यशैली को न्यायप्रिय और निर्भीक बताया.थाने से विदाई के मौके पर उन्होंने कहा कि मैं यहां से बहुत कुछ लेकर जा रहा हूं. लोगों का प्यार, सम्मान और आशीर्वाद. मैं आने वाले प्रभारी से भी कहूंगा कि जनता के साथ आत्मीय रिश्ता रखें. वही रिश्ता, जो मुझे यहां के लोगों से जोड़ता था.