सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजधानी पटना, जिसे कभी सबसे सुरक्षित इलाकों में गिना जाता था, अब अपराधों का नया गढ़ बनती दिख रही है। एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार पुलिस मुख्यालय से महज 1.5 किलोमीटर और पटना हाई कोर्ट से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक बड़े निजी अस्पताल, पारस हॉस्पिटल में दिनदहाड़े अपराधियों ने घुसकर गोली मारकर एक शख्स की हत्या कर दी। यह घटना दर्शाती है कि अब बिहार के उच्च संस्थान, न्यायपालिका, विधानसभा और सचिवालय जैसे अति-सुरक्षित माने जाने वाले इलाके भी सुरक्षित नहीं रहे हैं।
मृतक की पहचान चंदन मिश्रा के रूप में हुई है, जो बक्सर का रहने वाला था और जिस पर हत्या के कई मामले दर्ज थे। वह पैरोल पर इलाज के लिए पारस अस्पताल में भर्ती था, तभी प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सदस्यों ने उसे निशाना बनाया। इस वारदात ने मुख्यमंत्री आवास, जो घटनास्थल से मात्र 2 किलोमीटर दूर है, की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगर राजधानी के दिल में, जहां सत्ता के गलियारे हैं, अपराधी इतनी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, तो राज्य के बाकी हिस्सों में कानून-व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
हाल के दिनों में बिहार में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। व्यवसायी गोपाल खेमका और भाजपा नेता विक्रम झा की हत्या सहित कई अन्य वारदातें हुई हैं, जिन्होंने आम जनता के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार पर कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर हमलावर है। स्वयं को “सुशासन बाबू” कहने वाले मुख्यमंत्री के राज में आम लोगों का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर से उठता जा रहा है। सरेआम हत्याएं, रंगदारी, और गोलीबारी की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि बिहार में आखिर किसका राज चल रहा है।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का दावा है कि संगठित अपराध में कमी आई है और पुलिस 100 प्रतिशत मामलों का पता लगा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अवैध हथियारों की उपलब्धता और भूमि विवाद जैसे मुद्दे अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। जनता अब सरकार से ठोस कदम उठाने और अपराधियों पर नकेल कसने की मांग कर रही है, ताकि उनके भीतर सुरक्षा की भावना वापस लौट सके।