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आजकल दांतों का पीलापन होना एक आम समस्या बनती जा रही है। यह न केवल मुस्कान की खूबसूरती को कम करता है, बल्कि कई बार आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है। खराब खानपान, तंबाकू का सेवन, अत्यधिक चाय-कॉफी पीना, धूम्रपान और ओरल हाइजीन की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। आज आपको बताएंगे कि पीले और सफेद दातों में क्या अंतर होता है और दातों के पीले होने का मुख्य कारण क्या है,,,
दरअसल, डेंटल एक्सपर्ट का कहना हैं कि दांतों में पीलापन कई बार दांतों की सतह पर जमी प्लाक की वजह से होता है, जो समय के साथ टार्टर का रूप ले लेता है। इससे दांतों का रंग पीला या भूरा हो जाता है। इसके अलावा कुछ लोग जन्म से ही फ्लोराइड की अधिकता या दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण इस समस्या का सामना करते हैं। कई बार दांतों का पीलापन होना जेनेटिक का निशानी होता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने पर इनैमल घिसता है और नीचे की पीली परत ज्यादा दिखने लगती है। एक्सपर्ट के मानना है कि, दांतों का रंग देखकर नहीं पता लगाया जा सकता है कि दांत हेल्दी हैं या नहीं। आज के समय में ज्यादातर लोगों का दांत पीला होने का कारण स्मोकिंग है। सिगरेट और तंबाकू में निकोटीन पाया जाता है। जो दांतों पर पीले या भूरे दाग छोड़ता है। लंबे समय तक स्मोकिंग करने से ये दाग गहरे होते जाते हैं और दांतों की ऊपरी परत के अंदर तक पहुंच सकते हैं।
हालांकि, दांतों को बिल्कुल सफेद बनाए रखना नेचुरल रूप से हमेशा संभव नहीं होता है। समय के साथ-साथ हमारा खान-पान, उम्र, लाइफस्टाइल और आदतें दांतों के रंग को प्रभावित करती हैं। वहीं अगर आप रोजाना अच्छी ओरल हाइजीन अपनाते हैं, जैसे सही तरीके से ब्रश करना, फ्लॉस करना, शुगरी ड्रिंक्स से बचना और समय-समय पर डेंटल क्लीनिंग करवाते हैं तो दांतों को लंबे समय तक साफ, स्वस्थ और चमकदार जरूर बनाए रखा जा सकता है। इसलिए समय-समय पर डेंटल क्लीनिंग कराना बहुत जरूरी है। जिससे दांतों और मसूड़ों की बीमारियों का खतरा कम होता है। और सांस की बदबू से राहत मिलती है। दांत लंबे समय तक हेल्दी बने रहते हैं।