पटना विश्वविद्यालय का ‘अजब’ रवैया : 2025 में भी ‘नो नेटवर्क, नो रेस्पॉन्स’ – डिजिटल इंडिया को सैल्यूट!

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजधानी में स्थित प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय (Patna University) अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्नातकोत्तर (Postgraduate) पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए जारी अधिसूचना (notification) ने छात्रों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। विश्वविद्यालय ने 15 जुलाई, 2025 से 31 जुलाई, 2025 तक ऑनलाइन आवेदन (online application) आमंत्रित किए हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें छात्रों के सब्र का इम्तिहान ले रही हैं।

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विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा (एम.एड), विधि (एलएल.एम., एलएल.बी.), लोक प्रशासन और स्थानीय सरकार में पीजी डिप्लोमा जैसे नियमित पाठ्यक्रमों के साथ-साथ ग्रामीण अध्ययन, एमबीए, जैव रसायन, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी, समाज कार्य, कंप्यूटर एप्लीकेशन, महिला अध्ययन, पत्रकारिता एवं जनसंचार, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, संगीत में मास्टर और क्लिनिकल साइकोलॉजी, मानव संसाधन विकास, औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा जैसे स्व-वित्तपोषित कार्यक्रमों के लिए आवेदन मांगे गए हैं।

छात्रों को ऑनलाइन आवेदन के लिए पहले अपनी ईमेल आईडी (email ID) से ओटीपी (OTP) सत्यापित करना होता है, जिसके बाद फॉर्म भरने का पेज खुलता है। इस पेज पर अभ्यर्थी का नाम, माता-पिता का नाम, योग्यता आदि जानकारी भरनी होती है।

हालांकि, ईमेल से लॉगिन करते ही एक पॉप-अप मैसेज (pop-up message) दिखाई देता है, जिसमें पाँचवें बिंदु (5th point) पर एक मोबाइल या संपर्क नंबर ( 7858024144) दिया गया है, ताकि छात्रों को किसी भी समस्या के समाधान के लिए सहायता मिल सके। लेकिन छात्रों का आरोप है कि यह नंबर केवल दिखावे के लिए है। जब कोई छात्र इस नंबर पर संपर्क करने का प्रयास करता है, तो यह अक्सर बंद आता है

इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय की वेबसाइट (website) खोलने पर भी एक ‘पूछताछ नंबर’ – 06122678008 (enquiry number – 06122678008 ) दिखाई देता है। छात्रों के अनुसार, यह नंबर लगता तो है, लेकिन कोई उठाता नहीं है। यदि किसी भाग्यशाली छात्र का कॉल उठ भी जाता है, तो सामने से कोई जवाब नहीं आता। छात्रों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विश्वविद्यालय छात्रों की समस्याओं के प्रति बिल्कुल भी जवाबदेह नहीं है।

यह स्थिति बिहार की शिक्षा व्यवस्था (education system) पर सवाल खड़े करती है, जिसकी आलोचना अक्सर की जाती है। छात्रों का कहना है कि जब समस्याओं को सुनने वाला ही कोई नहीं है, तो उनका समाधान कैसे होगा? सरकार का यह तर्क कि बिहार में शिक्षा दर (literacy rate) कम है और छात्र नामांकन (enrollment) नहीं लेना चाहते, कहीं न कहीं इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा है। जब कोई विश्वविद्यालय छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी (responsibility) और जवाबदेही (accountability) तय नहीं करेगा, तो शिक्षा का स्तर स्वाभाविक रूप से गिरेगा। यह स्थिति न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है, बल्कि राज्य की समग्र शैक्षिक प्रगति में भी बाधा डालती है।

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