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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी माहौल को गरमाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव 10 अगस्त से संयुक्त ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। इस यात्रा की शुरुआत सासाराम से होगी, जो शाहाबाद क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा है। यह यात्रा 13 अगस्त को गया पहुंचेगी। इस यात्रा के माध्यम से दोनों नेता आगामी चुनावों के लिए महागठबंधन की जमीन तैयार करने की कोशिश में हैं।
सवाल यह है कि आखिर इस महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत के लिए सासाराम को ही क्यों चुना गया? इसके पीछे एक गहरा सियासी और सामाजिक गणित छिपा हुआ है। सासाराम, जिसे शाहाबाद क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है, दलित, महादलित, ओबीसी और मुस्लिम मतदाताओं का गढ़ है। इन समुदायों की प्रभावशाली मौजूदगी महागठबंधन के लिए एक मजबूत वोट बैंक रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से यह बात साफ हो गई थी। सासाराम सीट पर कांग्रेस के मनोज भारती ने बीजेपी को हराकर जीत दर्ज की थी, जो महागठबंधन के लिए एक बड़ी सफलता थी। इसके अलावा, शाहाबाद क्षेत्र की अन्य सीटें जैसे काराकाट, बक्सर और आरा में भी महागठबंधन ने कड़ी टक्कर दी थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सासाराम से यात्रा की शुरुआत करके राहुल और तेजस्वी मिलकर दलित (20%), कुशवाह (15%) और मुस्लिम (25.58%) मतदाताओं को एकजुट करने का संदेश देना चाहते हैं। यह क्षेत्र कांग्रेस की पूर्व दिग्गज नेता मीरा कुमार का भी गढ़ रहा है, जिससे यहां पार्टी का ऐतिहासिक प्रभाव है। इस यात्रा के जरिए दोनों नेता न सिर्फ अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने की कोशिश करेंगे, बल्कि पूरे बिहार में विपक्ष के लिए एक मजबूत माहौल बनाने का भी प्रयास करेंगे।
‘मतदाता अधिकार यात्रा’ का दूसरा चरण 16 अगस्त से शुरू होकर विभिन्न जिलों से होते हुए पटना में एक विशाल रैली के साथ समाप्त होगा।