सिटी पोस्ट लाइव : 90 के दशक के चर्चित नारे एकबार फिर से सुर्खियों में हैं… जातीय गोलबंदी और सवर्ण-बहुजन विरोध के पुराने फार्मूले पर फिर सियायत शुरू हो गई है.बिहार विधानसभा चुनाव एक बार फिर जाति और धर्म की रेखाओं पर खिंचता जा रहा है. सत्ता तक पहुंचने के लिए नेता जातीय ध्रुवीकरण को आजमाए हुए तरीके की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. माहौल ऐसा है कि ‘भूराबाल साफ करो’ और ‘बंटोगे तो कटोगे’ जैसे नारे फिर से सुर्खियों में हैं.बाहुबलियों को भी विशेष तरजीह दी जा रही है.
90 के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के दौरान गूंजा था नारा- ‘भूराबाल साफ करो. भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ (लाला) जैसी सवर्ण जातियों को निशाना बनाने के लिए “भूरा बाल साफ़ करो ” का नारा लालू प्रसाद ने दिया था.हालांकि उन्होंने इसे हमेशा खारिज किया. अब यह नारा फिर से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है. दो दिन पहले एनडीए खेमे के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा- ‘भूराबाल तय करेगा कि सिंहासन पर कौन बैठेगा.’ इसके 24 घंटे के भीतर ही राजद नेता अशोक महतो ने पलटवार किया-‘अबकी चुनाव में तमाम बहुजन एकजुट होकर भूराबाल को साफ करेंगे.’
अशोक महतो के बयान का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया है. एक नेता ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर खुलेआम कहा- ‘जो अशोक महतो की गर्दन लाएगा, उसे पांच लाख रुपए दूंगा.’ इसके जवाब में दूसरा वीडियो सामने आया, जिसमें चेतावनी दी गई- ‘पांच लाख रुपए कभी देखे हो? भस्म हो जाओगे.बिहार सरकार में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा- ‘भूराबाल को साफ करने वाला कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ. यह 90 का दशक नहीं, 2025 है. तब हम 23 सीटों तक सिमटे थे, इस बार राजद पूरी तरह साफ हो जाएगा.
बंटू सिंह भूमिहार समाज से आते हैं.उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी जातीय पहचान का हवाला देते हुए अशोक महतो को याद दिलाया- भूल गए?… तुम्हारा बाल मुंड़वाया गया था. पेट्रोल डाला गया था. कमर में रस्सा बांधा गया था. थूक चटवाई गई थी. जूते की माला पहनाई गई थी. फिर कह रहे हो ‘भूराबाल साफ करो’? खखोर देंगे.’
पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों की गोलबंदी और इसके जवाब में बड़ी जातियों की एकजुटता, बिहार की राजनीति का आजमाया हुआ फार्मूला रहा है. इस बार भी जातीय सम्मेलनों की रिकॉर्ड संख्या ने इस जमीन को और मजबूत किया है. इस बार रिकॉर्ड जातीय सम्मेलन हुए. हाल ही में हुए बिहार जातीय सर्वे और देशभर में संभावित जातीय जनगणना ने भी इस सोच को हवा दी है.केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का प्रसिद्ध नारा ‘बंटोगे तो कटोगे’ लगातार सुर्खियों में है. भाजपा नेताओं ने एसआईआर को लेकर मचे घमासान को धर्म से जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हाल ही में गिरिराज सिंह ने हिंदुओं को झटका मटन-चिकेन खाने की सलाह दी. उनका यह बयान सीधे तौर पर मुसलमानों को निशाने पर लेता दिखाई दे रहा है. इस मसले को राजद और कांग्रेस भी चुनावी मुद्दे के रूप में उठाते दिख रहे हैं.
आरजेडी का अशोक महतो प्रेम और जेडीयू का अनंत सिंह और बीजेपी का सतीश pandey को लेकर प्रेम उमड़ रहा है.ये तीनों एक जमाने में आतंक रहे हैं. बीजेपी सांसद मनन मिश्रा ने परशुराम जयंती के अवसर पर कहा कि बच्चों को आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनाना चाहिए, पर घर में एक बच्चा सतीश पांडेय जैसा भी होना चाहिए. सतीश पांडेय गोपालगंज इलाके के बाहुबली नेता हैं. कई मामलों में आरोपी हैं. उनके भाई पप्पू पांडेय जदयू के विधायक हैं. इसी तरह, हत्या के आरोप में जेल में बंद पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र रणधीर सिंह ने अपने एक आयोजन में कहा- ‘मेरे पिता समाज हित में जेल गए. वे चापलूस नहीं, सम्मान से समझौता नहीं करते’.
अति पिछड़ा समाज के यूट्यूबर दिलीप सहनी के साथ मंत्री द्वारा की गई बदसलूकी के विरोध में आरजेडी ने सीएम नीतीश कुमार और मंत्री जीवेश मिश्रा का पुतला फूंका.आरजेडी के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार सहनी के नेतृत्व में राजद नेताओं ने प्रदेश कार्यालय से आयकर गोलंबर तक प्रदर्शन किया. अरविंद ने कहा कि मंत्री पर केस दर्ज करवाने के लिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पटना से दरभंगा के सिंधवाड़ा थाना जाना पड़ा.उन्होंने कहा- बिहार में लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. अति पिछड़ा समाज को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर हम एक जुट होकर वैसे लोगों का मुकाबला करेंगे, जो सामाजिक न्याय की धारा को कमजोर कर रहे हैं.