“कुर्सी छोड़िए, क्लास पकड़िए!” बिहार में अब प्रधानाध्यापकों को भी पढ़ाना होगा अनिवार्य, वरना रुकेगी सैलरी!..

Ritu Raj

बिहार के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों के प्रधानाध्यापक (HM) और प्रधान शिक्षकों के लिए केवल ऑफिस संभालना काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें कक्षा में जाकर छात्रों को पढ़ाना भी होगा।

नए नियम;
शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, प्रधानाध्यापकों को अब प्रशासनिक कार्यों (जैसे मिड-डे मील या ऑफिस मीटिंग) का बहाना बनाकर शिक्षण कार्य से बचने की अनुमति नहीं होगी। हर प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक को प्रतिदिन 2 से 3 कक्षाएं लेनी होंगी। वहीं, शिक्षकों को एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी जिसमें शिक्षक का नाम, पढ़ाया गया विषय और छात्रों की उपस्थिति दर्ज होगी। दरअसल, यह रिपोर्ट ब्लॉक (BEA), जिला (DEO) और राज्य मुख्यालय भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर उनका सर्विस रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। स्कूल की जांच करने आने वाले अधिकारी भी अब सिर्फ रजिस्टर नहीं देखेंगे, बल्कि वे खुद बच्चों को पढ़ाएंगे और उनसे सवाल-जवाब करेंगे।

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अब ये बहाने नहीं चलेंगे;
अक्सर प्रधानाध्यापक निम्नलिखित कार्यों के नाम पर पढ़ाने से कतराते थे, जिन्हें अब “काम में लापरवाही” माना जाएगा:-
1) बीईओ या डीईओ कार्यालय की मीटिंग्स में जाना।
2) मिड-डे मील, पोशाक, साइकिल या छात्रवृत्ति योजनाओं का प्रबंधन।
3) परीक्षा ड्यूटी, कॉपी मूल्यांकन या किताबें लाने का कार्य।
4) प्रखंड स्तर पर ट्रेनिंग का संचालन या स्कूल की अन्य कागजी रिपोर्ट तैयार करना।

इस पहल से होने वाले मुख्य लाभ;

लाभ का क्षेत्रविवरण
शिक्षक-छात्र अनुपातकागज पर शिक्षकों की संख्या पूरी दिखेगी और वास्तविक कक्षाएं भी लगेंगी।
गुणवत्ता जांचप्रधानाध्यापक स्वयं देख पाएंगे कि शिक्षक किस शैली में पढ़ा रहे हैं और छात्रों को कितना समझ आ रहा है।
अनुशासनजब मुखिया खुद क्लास लेगा, तो बाकी शिक्षकों में भी गंभीरता आएगी और वे सही से पढ़ाएंगे।
संसाधनों का उपयोगहर कक्षा में FLN (Foundational Literacy and Numeracy) किट और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की उपयोगिता का सही पता चल सकेगा।
छात्रों का उत्साहछात्रों का सीधा जुड़ाव स्कूल के मुखिया से होगा, जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा।
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