सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के मोकामा में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज है, लेकिन इसकी वजह कोई चुनावी रैली नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की घोड़े पर सवारी है। तेजस्वी ने अपनी ‘बिहार अधिकार यात्रा’ के दौरान मोकामा में अचानक रथ छोड़कर घोड़े पर चढ़ गए, और उनकी यह ‘घुड़सवारी’ सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में चर्चा का विषय बन गई है। इस घटना को ‘छोटे सरकार’ कहे जाने वाले बाहुबली नेता अनंत सिंह को सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
मोकामा को लंबे समय से अनंत सिंह का गढ़ माना जाता रहा है, जहां उनकी मर्जी के बिना कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाना आसान नहीं है। ऐसे में, तेजस्वी का यह कदम सिर्फ एक सांकेतिक नहीं, बल्कि एक आक्रामक राजनीतिक संदेश है। बिहार में घोड़े की सवारी को अक्सर मर्दानगी और दबदबे का प्रतीक माना जाता है, और तेजस्वी ने इसी प्रतीक का इस्तेमाल कर अनंत सिंह के क्षेत्र में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।
कुछ ही दिन पहले अनंत सिंह भी अपने बेटे को घुड़सवारी सिखाते हुए देखे गए थे, जिसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हुई थी। अब तेजस्वी की घुड़सवारी को उनके उस कदम का सीधा जवाब माना जा रहा है।
क्या है सियासी संदेश?
तेजस्वी की इस ‘घुड़सवारी’ के पीछे कई राजनीतिक मायने छिपे हैं।
आक्रामक तेवर: यह तेजस्वी की नई, आक्रामक छवि को दर्शाता है। जो लोग उन्हें अक्सर ‘नेता-पुत्र’ या ‘क्रिकेटर’ कहते थे, उन्हें अब वह एक जमीनी और दमदार नेता के तौर पर अपनी छवि पेश कर रहे हैं।
सीधा संदेश: मोकामा में घोड़े पर चढ़कर तेजस्वी ने यह दिखा दिया है कि वह अनंत सिंह के गढ़ में उन्हें खुली टक्कर देने के लिए तैयार हैं। यह संकेत देता है कि अब मोकामा पर सिर्फ अनंत सिंह का एकाधिकार नहीं रहा।
वोट बैंक को संदेश: आरजेडी की राजनीति में यादव, मुस्लिम और निषाद समुदाय के वोट बहुत महत्वपूर्ण हैं। तेजस्वी का यह कदम इन समुदायों में अपनी पकड़ को और मजबूत कर सकता है, क्योंकि इसे एक बाहुबली नेता के खिलाफ खड़े होने का साहस माना जा रहा है।
सूरजभान सिंह की उम्मीदवारी का संकेत?
तेजस्वी ने भले ही सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी यह ‘घुड़सवारी’ इस बात की अटकलों को तेज करती है कि आरजेडी इस बार मोकामा सीट पर कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकती है। सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि आरजेडी यहां से सूरजभान सिंह या उनकी पसंद के किसी व्यक्ति को चुनावी मैदान में उतार सकती है।
अनंत सिंह और उनके परिवार का मोकामा पर दशकों से दबदबा रहा है। हाल ही में अनंत सिंह ने बयान दिया था कि आगामी चुनाव में विपक्ष की जमानत जब्त हो जाएगी। तेजस्वी की ‘घुड़सवारी’ को उनके इसी बयान का सीधा पलटवार माना जा रहा है। यह राजनीतिक चाल मोकामा में आरजेडी की पकड़ मजबूत करने और अनंत सिंह को यह संदेश देने के लिए है कि अब यहां उनकी मनमानी नहीं चलेगी।