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AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने किशनगंज से सीमांचल न्याय यात्रा की शुरुआत कर दी है। 27 सितंबर तक वे सीमांचल के चार जिलों—किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया—में रैलियां करेंगे।
AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने किशनगंज से चुनावी बिगुल शुरू कर दी है। 27 सितंबर तक बिहार के कई जिलों में अपनी चुनावी सभा करेंगे। ओवैसी का दावा है कि वे शिक्षा, रोजगार, बाढ़ राहत और अल्पसंख्यक अधिकार जैसे मुद्दों को उठाएंगे, लेकिन इस यात्रा के पीछे सियासी दांव भी साफ नजर आ रहा है। ओवैसी बार-बार कह रहे हैं कि भाजपा को रोकने के लिए AIMIM महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ना चाहता है। उनकी पार्टी ने सिर्फ 6 सीटों की मांग की थी, लेकिन RJD और कांग्रेस से अब तक कोई जवाब नहीं मिला। ओवैसी ने चेतावनी दी है कि गठबंधन न हुआ तो AIMIM मजबूती से अकेले लड़ेगी।

सीमांचल की 24 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक हैं। 2020 में AIMIM ने यहां 5 सीटें जीती थीं, जिससे महागठबंधन का गणित बिगड़ गया था। विश्लेषकों का मानना है कि अगर ओवैसी साथ आते हैं तो मुस्लिम वोटों में बंटवारा नहीं होगा, लेकिन अलग लड़ने पर इसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है। हालांकि, RJD और कांग्रेस की दिक्कत यह है कि वे किसी मजबूत मुस्लिम चेहरे को आगे आते नहीं देखना चाहते। वहीं, ओवैसी “मुस्लिम समाज का अपना नेता” होने की दलील देकर अपने प्रभाव को सीमांचल से बाहर भी फैलाना चाहते हैं। इसी कारण से वे गठबंधन की जिद पर और अलग लड़ने की तैयारी में भी है।