सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में साल 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Elections 2025) के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले, मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिल रहा है. यह चुनाव NDA, INDIA गठबंधन और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय संघर्ष होने की उम्मीद है.
हाल ही में जारी हुए सी-वोटर (C-Voter) के एक ताजा सर्वे (2 अक्टूबर को जारी) ने मुख्यमंत्री पद के लिए मतदाताओं की प्राथमिकताओं को सामने रखा है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) अब भी सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बने हुए हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है, जबकि राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री की रेस में ‘डार्क हॉर्स’ के रूप में मजबूती से एंट्री मारी है.
तेजस्वी यादव अभी भी आगे, लेकिन समर्थन में गिरावट
सर्वे के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के लिए मतदाताओं की पहली पसंद बने हुए हैं. सर्वे में शामिल 35% उत्तरदाताओं ने तेजस्वी यादव को अपनी शीर्ष पसंद बताया है. हालांकि, यह आंकड़ा फरवरी के मुकाबले 5 प्रतिशत अंक कम है, जो बताता है कि उनकी लोकप्रियता में हल्की गिरावट आई है. RJD के निष्ठावान और युवा मतदाताओं के बीच उनका आकर्षण अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है.
प्रशांत किशोर की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल
चुनावी रणनीतिकार से समाज सुधारक और फिर नेता बने प्रशांत किशोर की लोकप्रियता में इस सर्वे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रशांत किशोर का समर्थन नवीनतम सी-वोटर पोल में 23% तक पहुँच गया है. फरवरी में 14% से शुरू हुई उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है: जुलाई में 18%, अगस्त में 21% और अब 23%. उनका बढ़ता समर्थन यह दर्शाता है कि मतदाता पारंपरिक राजनीतिक दिग्गजों से परे विकल्पों के लिए खुले हैं, जिससे वह बिहार के चुनावी परिदृश्य में एक संभावित ‘गेम-चेंजर’ के रूप में उभर रहे हैं.
नीतीश कुमार का समर्थन अस्थिर
मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के समर्थन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, और वह CM की दौड़ में तीसरे स्थान पर हैं. सी-वोटर सर्वे में वर्तमान में 16% उत्तरदाताओं ने उन्हें अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना है. साल भर उनकी लोकप्रियता में अस्थिरता रही है: फरवरी में 18%, अप्रैल में 15%, जून की शुरुआत में 18%, अगस्त के मध्य में 14%, और सितंबर के अंत में 16%. विशेषज्ञों का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव मतदाताओं की थकान और प्रशांत किशोर जैसे उभरते दावेदारों के बढ़ते दबाव को दर्शाता है.
चुनाव की तैयारी और तारीखों का ऐलान
243 सदस्यीय राज्य विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) आज (सोमवार, शाम 4 बजे) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करने वाला है.
राजनीतिक दलों ने ECI से छठ पूजा (अक्टूबर के अंत में) के तुरंत बाद चुनाव कराने का आग्रह किया है, ताकि राज्य के बाहर काम करने वाले अधिकतम निवासी अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें. चुनाव की तैयारी में, ECI ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है. अंतिम सूची में 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जिसमें 47 लाख अयोग्य मतदाताओं को हटाया गया है और 21 लाख से अधिक योग्य मतदाताओं को जोड़ा गया है.