बिहार की सियासत में बाहुबल और राजनीति का रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे बाहुबली नेताओं का जलवा एक बार फिर चुनावी मैदान में दिखाई देने लगा है। पटना के मोकामा सीट से ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत कुमार सिंह जेडीयू के टिकट पर मैदान में हैं, तो वहीं कई दूसरे दबंग नेता भी अपने-अपने क्षेत्रों में सियासी किस्मत आजमा रहे हैं। आइए जानते हैं कौन हैं वे बाहुबली चेहरे जो आज भी बिहार की राजनीति में ताकत और प्रभाव का प्रतीक बने हुए हैं।
बिहार के बाहुबली नेताओं का जलवा फिर बरकरार:
बिहार की सियासत में बाहुबली नेताओं की भूमिका हमेशा से खास रही है। चुनावी मौसम आते ही इन दबंग नेताओं की सक्रियता बढ़ जाती है और जनता के बीच उनकी पकड़ का असर साफ झलकता है। इस बार भी कई पुराने बाहुबली नेता एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं, जो न सिर्फ अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं, बल्कि सियासी समीकरणों को भी प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
– रीतलाल यादव (दानापुर, पटना):
अपनी सख्त छवि और अटूट प्रभाव के लिए मशहूर रीतलाल यादव एक बार फिर आरजेडी के टिकट पर दानापुर से चुनाव लड़ रहे हैं। जेल में रहते हुए भी चुनाव जीतने का रिकॉर्ड रखने वाले रीतलाल अपने इलाके में एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक नेटवर्क बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर उनका नाम अब भी दबंग लेकिन लोकप्रिय नेता के रूप में लिया जाता है।
– राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (पूर्णिया/मधेपुरा):
बिहार की राजनीति में पप्पू यादव एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने बाहुबल के साथ-साथ विकास और जनता से जुड़ाव की छवि भी बनाई है। वे मधेपुरा और पूर्णिया से कई बार चुनाव लड़ चुके हैं। 2024 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पूर्णिया से लोकसभा चुनाव लड़ा था। कभी जन अधिकार पार्टी के मुखिया रहे पप्पू यादव ने अब अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया है और राज्य की राजनीति में फिर से प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
– अवधेश मंडल (रुपौली, पूर्णिया):
पूर्णिया क्षेत्र के चर्चित बाहुबली नेताओं में से एक अवधेश मंडल रुपौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। उनके परिवार की राजनीति में गहरी पैठ है। 2024 में उनकी पत्नी बीमा भारती ने आरजेडी के टिकट पर पूर्णिया से चुनाव लड़ा था। अवधेश मंडल अपने क्षेत्र में आज भी एक सक्रिय और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा बने हुए हैं।
– मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह (एकमा, सारण):
सारण जिले की एकमा सीट से लोजपा के उम्मीदवार मनोरंजन सिंह, जिन्हें स्थानीय लोग धूमल सिंह के नाम से जानते हैं, पहले भी विधायक रह चुके हैं। अपने इलाके में वे न केवल एक दबंग नेता के तौर पर जाने जाते हैं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में उनकी पकड़ और संगठन क्षमता को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
– अमरिंदर उर्फ पप्पू पांडे (कुचायकोट, गोपालगंज):
गोपालगंज जिले के कुचायकोट से जेडीयू उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर रहे पप्पू पांडे बिहार की बाहुबली राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं और उनका प्रभाव इस बार भी चुनावी गणित को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।
बिहार में बाहुबली नेताओं की अगली पीढ़ी भी सियासी मैदान में
– सुनील पांडे के बेटे विशाल प्रशांत (बक्सर):
बक्सर से इस बार बाहुबली नेता सुनील पांडे के बेटे विशाल प्रशांत बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए विशाल ने स्थानीय स्तर पर संगठन को मज़बूत किया है और युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
– हुलास पांडे (ब्रह्मपुर):
सुनील पांडे के भाई और प्रभावशाली नेता हुलास पांडे ब्रह्मपुर सीट से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पांडे परिवार का इस इलाके में खासा प्रभाव रहा है, और हर बार की तरह इस बार भी यह सीट दिलचस्प मुकाबले में तब्दील हो चुकी है।
– शिवानी शुक्ला (वैशाली):
वैशाली की राजनीति में बाहुबली नेता मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने के साथ-साथ शिवानी युवाओं और महिलाओं के बीच अपनी सक्रिय छवि से पहचान बना रही हैं।
– ओसामा शहाब (रघुनाथपुर, सिवान):
सिवान के बाहुबली पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब आरजेडी के टिकट पर रघुनाथपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। अपने पिता की तरह ओसामा भी सिवान की राजनीति में एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। शहाबुद्दीन की 2021 में तिहाड़ जेल में मौत के बाद ओसामा अब उस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा संभाल रहे हैं।
– चेतन आनंद (नबीनगर, औरंगाबाद):
औरंगाबाद जिले की नबीनगर सीट से बाहुबली आनंद मोहन सिंह के बेटे चेतन आनंद जेडीयू के टिकट पर मैदान में हैं। आनंद मोहन कभी शिवहर से सांसद रह चुके हैं और एक समय बिहार की सियासत में सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते थे। उनकी पत्नी लवली आनंद ने भी शिवहर से जेडीयू उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी, जबकि अब चेतन आनंद उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
– विभा देवी (नवादा):
नवादा सीट से राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। राजबल्लभ यादव भले ही जेल में सजा काट रहे हों, लेकिन नवादा में उनका और उनके परिवार का असर अब भी कायम है। विभा देवी इससे पहले भी विधानसभा में पहुंच चुकी हैं।
– अनीता देवी (वारिसलीगंज):
कुख्यात अशोक माहतो की पत्नी अनीता देवी वारिसलीगंज सीट से आरजेडी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अशोक माहतो का नाम एक समय में शेखपुरा और नवादा इलाके की राजनीति में सबसे प्रभावशाली बाहुबलियों में शुमार था, और अब अनीता देवी उसी क्षेत्र में सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं।
– रंधीर सिंह (मंझी, सारण):
महाराजगंज के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह के बेटे रंधीर सिंह सारण जिले की मंझी सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रभुनाथ सिंह फिलहाल एक हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से उनका नाम आज भी सियासी चर्चा का हिस्सा बना रहता है।