सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में ‘एकजुटता’ का दावा करने वाला महागठबंधन चुनावी मोर्चे पर खुद ही बिखरता दिख रहा है। सीट बंटवारे के बावजूद गठबंधन के प्रमुख घटक दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस , और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI/भाकपा) के बीच करीब एक दर्जन सीटों पर ‘दोस्ताना संघर्ष’ चल रहा है। चैनपुर, वैशाली, नरकटियागंज, राजापाकर और दरभंगा (गौड़ाबौराम) जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर महागठबंधन के प्रत्याशी एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं, जिससे गठबंधन के आधार वोटबैंक में भारी बिखराव तय माना जा रहा है।
महागठबंधन के शीर्ष नेतृत्व ने देर से सीट बंटवारा किया, पर आपसी खींचतान की गांठें अनसुलझी ही रह गईं, जो अब मैदान में खुल गई हैं। स्थिति यह है कि कई सीटों पर दिग्गज नेता प्रचार से भी किनारा कर रहे हैं। भाकपा ने तो खुलेआम कांग्रेस पर ‘एनडीए का साथ देने’ का आरोप लगाना शुरू कर दिया है।
प्रमुख सीटों पर ‘अपनों’ का टकराव
महागठबंधन में यह आंतरिक कलह सर्वाधिक सीटों पर कांग्रेस को चुनौती दे रहा है, जो अपनी परंपरागत सीटों पर भी सहयोगी दलों से घिर गई है।
चैनपुर (कैमूर): RJD बनाम VIP इस सीट पर राजद से बृजकिशोर बिंद और वीआईपी से बालगोविंद बिंद आमने-सामने हैं। दोनों के व्यक्तिगत प्रभाव से महागठबंधन का आधार वोट बंटेगा, जिसका सीधा फायदा एनडीए के जदयू प्रत्याशी मो. जमां खां को मिल सकता है।
वैशाली: RJD बनाम कांग्रेस यहां कांग्रेस ने संजीव सिंह को तो राजद ने अजय कुशवाहा को मैदान में उतारा है। यह आंतरिक संघर्ष महागठबंधन के दोनों घटक दलों की वास्तविक ताकत की परीक्षा लेगा, जबकि एनडीए की ओर से जदयू के विधायक सिद्धार्थ पटेल को उनके चाचा वृशिण पटेल (निर्दलीय) से पारिवारिक चुनौती मिल रही है।
नरकटियागंज: RJD बनाम कांग्रेस की ‘देख लेने’ की जिद 2015 में कांग्रेस ने यह सीट जीती थी, पर इस बार कांग्रेस के शाश्वत केदार (पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पौत्र) के सामने राजद के दीपक यादव खड़े हैं। दोनों की नजर आइएनडीआइए के आधार वोटरों मुस्लिम और यादव पर है। यह ‘दोस्ताना संघर्ष’ अब ‘एक-दूसरे को देख लेने की जिद’ बन गया है।
राजापाकर (वैशाली): कांग्रेस को भाकपा से चुनौती 2020 की विजेता कांग्रेस की प्रतिमा कुमारी को न केवल जदयू से, बल्कि सहयोगी भाकपा के मोहित पासवान से भी दोहरी चुनौती मिल रही है। यह सीट गठबंधन समझौते में भाकपा के खाते में गई थी, पर कांग्रेस ने इसे नहीं माना।
गौड़ाबौराम (दरभंगा): तेजस्वी ने VIP को बताया अधिकृत इस सीट पर राजद के अफजल अली खां प्रचार में हैं, लेकिन तेजस्वी यादव ने चुनावी सभा में वीआईपी के संतोष सहनी को महागठबंधन का अधिकृत प्रत्याशी बताकर माला पहना दी। तेजस्वी ने ‘त्याग’ की अपील की है, पर राजद प्रत्याशी प्रचार से हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे मुस्लिम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति है।
बछवाड़ा (बेगूसराय): भाकपा बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर यह सीट समझौते में भाकपा के खाते में गई थी, पर भाकपा के अवधेश कुमार राय के साथ कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीबदास भी मैदान में हैं। 2020 में निर्दलीय रहते हुए गरीबदास ने 39 हजार से अधिक वोट पाए थे, जिससे इस बार वोटों का बंटवारा तय है। 2020 में भाजपा ने यह सीट मात्र 484 वोटों से जीती थी।
NDA के लिए साफ हो रही राह
इन सीटों के अलावा, कहलगांव (भागलपुर) में कांग्रेस की परंपरागत सीट पर राजद ने प्रत्याशी उतार दिया है, सिकंदरा (जमुई) में कांग्रेस और राजद के दिग्गज आमने-सामने हैं, और करगहर (रोहतास) में कांग्रेस व भाकपा दोनों खम ठोक रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन के घटक दलों के बीच जारी यह ‘दोस्ताना संघर्ष’ दरअसल आपसी वर्चस्व की लड़ाई है, जो सीधे तौर पर एनडीए (NDA) को लाभ पहुंचा रही है। वोटों के इस बिखराव से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत की राह आसान होती दिख रही है। यह स्थिति बिहार की राजनीति में गठबंधन धर्म की कमियों को उजागर कर रही है।