बिहार चुनाव 2025: VIP का सूपड़ा साफ, मुकेश सहनी ने मानी हार; ‘महिलाओं के ₹10,000’ को ठहराया हार का बड़ा कारण

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी के लिए एक बड़ी निराशा लेकर आए हैं। महागठबंधन के उप-मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार के रूप में चुनावी मैदान में उतरे सहनी को उम्मीद थी कि निषाद समुदाय का एकजुट वोट बैंक उन्हें सत्ता के करीब ले जाएगा, लेकिन नतीजों ने उनके सभी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। उनकी पार्टी एक भी सीट जीतने में विफल रही, जबकि NDA ने 202 सीटों के साथ प्रचंड जीत दर्ज कर ली।

नतीजों के बाद, मुकेश सहनी ने एक निजी चैनल से बातचीत में हार को स्वीकार किया और एनडीए की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। हालांकि, उन्होंने अपनी हार और महागठबंधन की असफलता के पीछे एक बड़ा और सीधा कारण बताया: महिलाओं को दी गई आर्थिक सहायता।

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सहनी का आरोप :”₹10,000 ने मोड़ दी हवा”
सहनी ने साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (MMRY) के तहत महिलाओं को सीधे बैंक खातों में दी गई आर्थिक सहायता ने चुनाव की हवा पूरी तरह से एनडीए के पक्ष में मोड़ दी।
सहनी ने कहा, “गरीबी, संकट और आर्थिक तंगी के बीच जब महिलाओं को सीधे बैंक खाते में ₹10,000 रुपये मिले, तो स्वाभाविक है कि उन्होंने उसी पक्ष में मतदान किया, जहाँ से उन्हें सीधे मदद मिली।”

उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के तहत कुल 2.10 लाख रुपये तक की सहायता का वादा किया गया था, लेकिन चुनाव के दौरान खातों में डाली गई पहली किश्त (₹10,000) ने महिला मतदाताओं को बड़े पैमाने पर NDA की ओर मोड़ दिया। बिहार में इस बार महिला मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर रहा, और सहनी ने माना कि इसी निर्णायक महिला वोट ने NDA की जीत को अभूतपूर्व बहुमत दिलाया।

निषाद वोट NDA की ओर झुका, स्वीकारा
मुकेश सहनी ने इस बात को भी स्वीकार किया कि जिस निषाद समुदाय के वोट बैंक पर उनकी राजनीतिक नींव टिकी हुई थी, वह भी अंततः NDA की तरफ झुक गया। उन्होंने कहा, “यह साफ दिख रहा है कि निषाद समाज ने इस बार NDA को प्राथमिकता दी। हमें यह समझना होगा कि हमारी रणनीति कहाँ कमज़ोर रही।”

उन्होंने माना कि NDA की ओर से इन समुदायों के लिए बनाई गई लक्षित सरकारी योजनाओं ने ज़मीनी स्तर पर बड़ा असर डाला है। चुनावी अभियान के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए उनके वीडियो जैसे बेगूसराय में राहुल गांधी के साथ तालाब में कूदने वाला क्लिप इंटरनेट की गूंज को वोटों में बदलने में विफल रहे।

सहनी का खाता न खुल पाना महागठबंधन के लिए भी एक बड़ा झटका है, क्योंकि उन्हें उप-मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर निषाद समाज को साधने की कोशिश की गई थी। अब सहनी ने कहा है कि जनादेश सर्वोपरि है और उनका अगला कदम अपनी कमियों की गहराई से जांच कर भविष्य की रणनीति तैयार करना होगा।

यह चुनाव साहनी के लिए एक कड़ा सबक साबित हुआ, जिसने यह दिखा दिया कि भावनात्मक अपील या सोशल मीडिया की लोकप्रियता से ज़्यादा, ज़मीनी आर्थिक सहायता और वास्तविक सरकारी योजनाओं का प्रभाव मतदाताओं के निर्णय पर निर्णायक होता है।

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