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बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ऐतिहासिक जीत ने न केवल राज्य की राजनीति में अपना प्रभुत्व स्थापित किया है, बल्कि इसका सीधा असर अब संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के समीकरणों पर भी पड़ने वाला है। विधानसभा में मिले प्रचंड संख्या बल के दम पर NDA अब आगामी वर्षों में बिहार से राज्यसभा की सभी सीटें आसानी से जीत सकता है। राजनीतिक विश्लेषणों के अनुसार, 2030 तक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का राज्यसभा से पूरी तरह सफाया हो सकता है।
उच्च सदन में NDA को मिलेगी बड़ी मजबूती
वर्तमान में बिहार से राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं, जिनमें से राजद के पास पांच और कांग्रेस के पास एक सीट है। लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, विपक्षी महागठबंधन के पास अब राज्यसभा सीटों को जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं बचा है। इस स्थिति से उच्च सदन में राजग को अपना संख्या बल बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास अब भी पूर्ण बहुमत नहीं है।
अगले साल खत्म होगा दो राजद सदस्यों का कार्यकाल
राज्यसभा में बदलाव का सिलसिला अगले साल की शुरुआत में ही शुरू हो जाएगा, जब राजद के दो राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। मौजूदा संख्या बल पूरी तरह से राजग के पक्ष में है, जिसका अर्थ है कि इन दोनों सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन का कब्जा होना लगभग तय है।
इसके अलावा, राजग के तीन राज्यसभा सदस्य हरिवंश, रामनाथ ठाकुर (दोनों जदयू) और उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) का कार्यकाल भी 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो जाएगा।
राजद का सफाया: 2030 तक शून्य
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 42 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में, ताजा नतीजों के बाद महागठबंधन के पास कुल 35 सीटें हैं (राजद-25, कांग्रेस-6, भाकपा-माले-2, माकपा-1 और आइआइपी-1)। यह संख्या एक भी सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है।
राज्यसभा चुनाव का यह चक्र आगे भी जारी रहेगा, जो राजद के लिए सबसे बड़ा झटका साबित होगा:
2028 की शुरुआत: राजद के फैयाज अहमद का कार्यकाल समाप्त होगा। इस चरण में भाजपा के तीन और जद(यू) के एक सदस्य का कार्यकाल भी खत्म होगा।
2030 की शुरुआत: इस दौर में राजद के शेष दो सदस्य मनोज कुमार झा और संजय यादव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 को समाप्त होगा। इसी के साथ कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह और भाजपा-जद(यू) के तीन सदस्यों का कार्यकाल भी समाप्त होगा।
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर, यह स्पष्ट है कि 2030 तक राजद का उच्च सदन में कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं बचेगा। बिहार चुनाव के इस परिणाम ने उच्च सदन में विपक्ष की ताकत को कम करने और सत्ता पक्ष को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने का रास्ता खोल दिया है।